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ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर

ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर
ज़िंदगी में मौत सा हाल न कर
काँटों को इतनी तरज़ीह देकर
यूं फूलों का जीना मुहाल न कर
ये दुनिया इक मुसाफ़िर ख़ाना
इसमें बसने का ख़याल न कर
ग़मे दहर का झगड़ा लेकर
तूं अपने घर में बवाल न कर
दर्द का दरमाँ तड़फ ही है
करके मुहब्बत मलाल न कर
आग बहुत दुनिया में,पानी कम
ये आंसू बेवज़ह पैमाल न कर
याद कर वो माज़ी के मंज़र
तूं अपना बरबादे-हाल न कर
चांदनी की चाह में यूं न पगला
इन अंधेरों से विसाल न कर

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Comment

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Comment by Ravinder Gupta on May 5, 2010 at 8:32am
Gazal Achhi Hai! Par Mujhe lagta hai ki sur milana kafi mushkil hoga, agar is gazal ko gaana pade!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 4, 2010 at 5:23pm
वाह दीदी वाह, बहुत ही उम्द्दा ग़ज़ल आपने पोस्ट किया है, मुझे गर्व है की हम लोगो के बीच इतनी अच्छी लेखिका है, या कहे की आप के रूप मे ओपन बुक्स परिवार ने एक नयाब हीरा प्राप्त किया है, इस रचना की सभी लाइने एक से बढ़कर एक है, फिर भी कुछ लाइने तो बेजोड़ है,

ये दुनिया इक मुसाफ़िर ख़ाना
इसमें बसने का ख़याल न कर
ग़मे दहर का झगड़ा लेकर
तूं अपने घर में बवाल न कर


इस रचना के लिये केवल एक शब्द "शानदार"
बहुत बहुत धन्यवाद इस पोस्ट के लिये,
Comment by asha pandey ojha on May 4, 2010 at 5:15pm
Preetam ji & Amrendra ji aapka bahut bahut aabhar..!
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 4, 2010 at 2:45pm
bahut acchi rachna hai ye aasha didi......dhanyabaad yahan humlogo ke beech share karne ke liye....
ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर
ज़िंदगी में मौत सा हाल न कर
काँटों को इतनी तरज़ीह देकर
यूं फूलों का जीना मुहाल न कर
Comment by asha pandey ojha on May 4, 2010 at 2:09pm
Housla Afzai ka tahe dil se Shukriya Admin ji..!
Comment by Admin on May 4, 2010 at 1:55pm
काँटों को इतनी तरज़ीह देकर
यूं फूलों का जीना मुहाल न कर,

बेहतरीन, गहरे अर्थ लिये हुए यह रचना वाकई बेहतरीन है, इस गजल की सभी शेयर एक से बढ़कर एक है, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल है, बहुत बढ़िया , एक बार फिर हम लोगो के सामने खुबसूरत ग़ज़ल अपने पेश किया है, तहे दिल से शुक्रिया,

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