For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जिंदगी इतनी खूबसूरत होगी,
जिंदगी में इतने रंग होंगे,
जिंदगी इतनी खुशहाल होगी,
जिंदगी में इतना प्यार होगा,
ऐसा कभी सोचा न था ।

जिंदगी निस्ठुर भी होगी,
जिंदगी थपेड़े भी मारेगी,
जिंदगी हम पर हँसेगी,
जिंदगी भँवर में फँसायेगी,
ऐसा कभी सोचा न था ।

जिंदगी कर्म का पाठ पढ़ाएगी,
जिंदगी कटु सत्य बताएगी,
जिंदगी सही रास्ता दिखायेगी,
जिंदगी विजय पथ भी बताएगी,
ऐसा कभी सोचा न था ।

जिंदगी में कोमलता होगी,
जिंदगी इतनी नाजुक होगी,
जिंदगी इतनी भावुक होगी,
जिंदगी परीक्षा भी लेगी,
ऐसा कभी सोचा न था ।

जिंदगी नीरस होगी,
जिंदगी पीड़ा देगी,
जिंदगी हार देगी,
जिंदगी रुलाएगी भी,
ऐसा कभी सोचा न था ।

संघर्ष करो जिंदगी से,
शिक्षा लो जिंदगी से,
हार कभी न मानो जिंदगी से,
जीतकर दिखाओ जिंदगी से,
बता दो औकात,जिंदगी को जिंदगी की ।

Views: 481

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 8, 2012 at 8:11am

ज़िंदगी हर कदम एक नयी जंग है.....

संघर्ष करो जिंदगी से,
शिक्षा लो जिंदगी से,
हार कभी न मानो जिंदगी से,
जीतकर दिखाओ जिंदगी से,
बता दो औकात,जिंदगी को जिंदगी की ।...............बधाई इस अभिव्यक्ति पर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 7, 2012 at 6:00pm

जीतकर दिखाओ जिंदगी से,
बता दो औकात,जिंदगी को जिंदगी की ... .......   ?????

आपकी प्रस्तुति पर आपको हार्दिक बधाई. सतत प्रयासरत रहें.

Comment by रविकर on November 7, 2012 at 11:50am

बहुत बढ़िया आदरणीय ।

शुभकामनायें स्वीकारें ।।

जीवन का पहला चरण, इसीलिए खुशहाल ।

दूजा ही सबसे अधिक, झेले पीर बवाल ।

झेले पीर बवाल, यहीं पर आकर सोचे ।

रही जिंदगी पाल, यहीं पर बेढब लोचे ।

करे परीक्षण राम, बड़ा जालिम यह यौवन ।

रहे नियंत्रित काम, नीति नियमों में जीवन ।।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
1 minute ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
10 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service