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मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

निज लक्ष्य  से ना हटें कभी 

अटूट  निश्चय पे डटें सभी 

ना सत्य वचन  से फिरें कभी 

ना निज मूल्यों से गिरें कभी 

जो गर्दन नीची कर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

दूजों के दुःख अपनाएँ हम 

 अक्षत पुष्प बरसायें हम 

नेह  का निर्झर  बहायें हम

जग  के संताप मिटायें हम

भगवन ऐसा अवसर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

प्रीत प्रकृति नव्य सृजन करे 

पूर्ण  समर्पित हिय भाव भरे 

तन मन  में सिमटी व्याधि हरे 

कलुषित कलंकित  भाव झरें 

मति संयत  उन्नत कर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

नई शक्ति का समावेश हो 

अनुद्दत आचरण विशेष  हो 

ना आक्रोश  ना आवेश हो 

नव्यजीवन सूत्र विशेष हो 

नवगीतों में नव स्वर दे   

मुझे तलाश है उस उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

***********************************************  

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 12:47pm

लक्ष्मण प्रसाद जी आपकी टिपण्णी सर आँखों पर हार्दिक आभार आपको रचना पसंद आई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 23, 2012 at 12:12pm

प्रीत प्रकृति नव्य सृजन करे,पूर्ण  समर्पित हिय भाव भरे 

तन मन  में सिमटी व्याधि हरे, कलुषित कलंकित  भाव झरें 

मति संयत  उन्नत कर दे, और नवगीतों में नव स्वर दे   

मुझे तलाश है उस उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

बहुत सुन्दर आकांशा लिए भावो की काव्य रचना के लिए हार्दिक बधाई

आदरणीया राजेश कुमारी जी  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 10:13am

गणेश बागी जी आपकी प्रतिक्रिया से मेरी लेखनी को नई उर्जा मिली हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 10:11am

राज नवद्वी जी आपकी प्रतिक्रिया से उत्साह वर्धन हुआ बहुत बहुत शुक्रिया 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 23, 2012 at 9:42am

//

नई शक्ति का समावेश हो 

अनुद्दत आचरण विशेष  हो 

ना आक्रोश  ना आवेश हो 

नव्यजीवन सूत्र विशेष हो//

बहुत ही सुन्दर चाहत, इस रचना में दुनिया बदलने की कुबत है आदरणीया, पूरी रचना बहुत ही प्रवाहमय बन पायी है, बहुत बहुत बधाई इस अभिव्यक्ति पर |

Comment by राज़ नवादवी on September 23, 2012 at 9:28am

वैसे तो सम्पूर्ण रचना में गज़ब का ओज और प्रवाह है, परन्तु विशेष तौर पे-

१) दूजों के दुःख अपनाएँ हम ...........एवं

२) नई शक्ति का समावेश हो....

इन दो अंतरों ने भाव विह्वल किया... 'न आक्रोश, न आवेश' की बात बहुत पसंद आई. बधाई हो राजेश जी! 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 8:52am

हार्दिक आभार नीरज जी उत्साह वर्धन करती हुई आपकी प्रतिक्रिया के लिए  आपका स्वागत है  आपको रचना पसंद  आई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 8:51am

हार्दिक आभार ब्रिजेश कान्त जी आपका स्वागत है  आपको रचना पसंद  आई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 8:50am

हार्दिक आभार गुल सारिका झा जी आपका स्वागत है  आपको रचना पसंद  आई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 8:49am

हार्दिक आभार सतीश अग्निहोत्री जी आपको रचना पसंद  आई 

कृपया ध्यान दे...

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