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बिखरे हुए पन्ने किताबों के आगे,
जिंदगी रुक गयी हिसाबों के आगे,

सवालों के पीछे सवालों के तांते,
उलझी जवानी जवाबों के आगे,

जीने में जद्दोजहद हो गयी है,
सुधरे हुए हारे खराबों के आगे,

कोई चोट देकर कोई चोट खाकर,
सब लेटे पड़े हैं शराबों के आगे,

आँखों में सजाये जिसे बैठे सभी हैं,
मंजिल नहीं है उन ख्वाबों के आगे.......
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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2012 at 10:41am

डा. प्राची जी तथा मिश्र जी आप दोनों का बहुत-२ शुक्रिया


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Comment by rajesh kumari on July 5, 2012 at 11:17pm

बहुत सुन्दर सभी शेर बढ़िया है 

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 5, 2012 at 10:30pm

बिखरे हुए पन्ने किताबों के आगे,
जिंदगी रुक गयी हिसाबों के आगे,

सवालों के पीछे सवालों के तांते,
उलझी जवानी जवाबों के आगे, बेहेतरिन बेहेत्रिन वाह वाह

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 5, 2012 at 5:06pm

आदरणीय रेखा जी , बहुत- बहुत शुक्रिया.

Comment by Rekha Joshi on July 5, 2012 at 5:03pm

अरुण जी ,

आँखों में सजाये जिसे बैठे सभी हैं, 
मंजिल नहीं है उन ख्वाबों के आगे,अटी सुंदर अभिव्यक्ति 

कृपया ध्यान दे...

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