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आग उगलते सूरज का रथ
दौड़ रहा था
अनवरत, अन्तरिक्ष पर
पीछे जन्म लेते
धूल के गुबार ने ढक
दिए सब वारि के सोते
कुम्भला गए दम घोंटू
गर्द में कोमल पौधों के पर
चिपक गए परिधान बदन से
हाँफते हुए ,पसीनों से लथपथ
उसके अश्वों के स्वेद सितारे
छितरा गए सागर की चुनरी पर
मिल गए खारे सागर की बूंदों से
जबरदस्त उबाल उठा
सागर के अंतर में
प्यासी धरा की आहें
कर बैठी आह्वान
मंथन से मुक्त होकर
उड़ चला वो वाष्पित आँचल
सुदूर गगन में
मेघ श्रंखला को ढकने
खोल दिए पट अभ्र्पारों ने
चुका दिया धरा का ऋण
खुल के बरसे मूसलाधार |

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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 10:22pm

राजेश कुमारी जी,
विधाएं सभी अच्छी हैं ...मैंने तो महज़ अपनी पसन्द की बात की थी.......

अब मुझे  चना मसाला  सब्ज़ी पसन्द नहीं, इसका मतलब ये तो  नहीं कि मैं चना मसाला को ख़राब कह रहा हूँ .........बस  मैं  नहीं खाता ...हा हा हा

आप चाहे जिस विधा में सृजन करें........आप मर्ज़ी की मालिक हैं जी.........और कहना मत किसी से  महिलायें मालिक ही होती हैं...हा हा हा


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 26, 2012 at 9:51pm

अलबेला खत्री जी बहुत-बहुत हार्दिक  आभार आपका चलो अतुकांत कविता में आपको यह कविता अच्छी लगी एक बात बताऊँ आप मेरा ब्लॉग खोलकर देखें तो एक डेड साल पहले आपको मेरी एक भी अतुकांत कविता नहीं मिलेगी पहले मुझे भी अजीब लगती थी पर अब अच्छी भी लगती हैं और लिखने में मजा भी आने लगा है मैं हर एक विधा में लिखना चाहती हूँ |ये बात तो सही है जो बात तुकांत कविता में है वो कही नहीं 

Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 9:16pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी,
बहुत बहुत अभिवादन
___अतुकान्त कवितायें  मुझे कम ही पसन्द आती हैं . या यों भी कह सकता हूँ कि इनमे मेरी रुचि ज़रा कम ही होती है . फिर भी आज तक जितनी ऐसी कवितायेँ  मुझे अच्छी लगी हैं ....आपकी यह कविता उनमे बहुत ऊपर विराजती है .

उसके अश्वों के स्वेद सितारे
छितरा गए सागर की चुनरी पर
मिल गए खारे सागर की बूंदों से
जबरदस्त उबाल उठा

__एक अनूठे विषय पर इतने  शानदार प्रवाह के साथ  सुन्दर शब्दावली  से सजा कर  आपने  अनुपम रचना प्रस्तुत की है . मेरा  हार्दिक अभिनन्दन स्वीकार करें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 26, 2012 at 4:43pm

कुमार गौरव जी हार्दिक आभार 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 26, 2012 at 4:31pm
अत्यंत सुन्दर रचना, सटीक शब्दोँ से सजी, बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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