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                                                             सूरज की गरमी को देखो, पड़ती सब पे भारी

सूखे ताल तलैया भाई,  पिघली सड़कें सारी

सूख चली देखो हरियाली, सहमा उपवन सारा. 

पंथिन को तो छांह नहीं अब,  क्योंकर चलता आरा

 

पशु पक्षी सब प्यास के मारे,  हुए  हाल बेहाल 

जल संसाधन मंत्री ए.सी., बैठे फेंके जाल 

उनकी बात भी छोड़ो भैया, ऐसा कुछ करवा दो 

आँगन अन्दर बाहर तालन, मां पानी भरवा दो 

 

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 13, 2012 at 4:09pm
आदरणीय   मोनिका    जी, सादर 
आपने रचना को  मान दिया, आभार , 
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 12, 2012 at 5:22pm
आदरणीय राजेश कुमारी जी, सादर 
उत्साहवर्धन हेतु आभार. 
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 12, 2012 at 5:18pm
आदरणीय लोहानी जी. सादर
आपने अपना कीमती समय देकर भाव को सराहा , धन्यवाद .

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 10, 2012 at 11:44am

प्रदीप कुमार कुशवाह जी जल सरक्षण   पर बहुत सुन्दर बेहतरीन लिखा है बहुत बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 10, 2012 at 11:24am

आदरणीय लोहानी  जी , सादर 

सराहना हेतु धन्यवाद.
Comment by Monika Jain on May 9, 2012 at 4:40pm

Namskaar Pradeep ji antim panktiyon me puri ki puri kavita ka saar likh diya aapne sach yadi aaj bhi jalsanrakshan ke baare me nahi socha to wo din door nahi jab dusra dwitiy vishw yuddg paani ke liye hoga.

Comment by Sarita Sinha on May 8, 2012 at 8:56pm

आदरणीय कुशवाहा जी,नमस्कार, बदलते पर्यावरण की चिंता और समाधान दोनों प्रस्तुत करती उत्तम रचना..साधुवाद....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 8, 2012 at 10:43am
सादर प्रणाम कुशवाहा सर.

सन्देश देती रचना, बधाई .

Comment by Bhawesh Rajpal on May 8, 2012 at 6:33am

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

Comment by Bhawesh Rajpal on May 8, 2012 at 6:27am
कुशवाहा जी  , जल की उपियोगिता  का सुन्दर वर्णन  ! यूँ ही नहीं कहा जाता - जल ही जीवन है  ! धरा पर जीवन का अस्तित्व तब तक ही है जब तक जल है !
मध्य में व्यंग्य का पुट  अच्छा लगा !  आपको  बहुत-बहुत बधाई  ! -  भवेश राजपाल  ! 

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