For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 तनहा खड़ा एक पेड़ हूँ मैं 

मन ही मन खड़ा  छटपटाता हूँ 

अतीत की धुंद में खो जाता हूँ 

कभी था बाग़ ए बहार यहाँ 

उजड़ा गुलशन बिखरा ये चमन 

लगता अब जैसे शमशान यहाँ 

आज न वो आँगन है 

न ही वे संगी साथी 

जिन पे  फाँसी झूले थे सेनानी 

भारत के अमर वीर बलिदानी 

नगर विकास  सौंदर्यीकरण की आंधी में 

खेतों संग वे भी आरी की भेंट चढ़े 

हम ही रह गए यहाँ तनहा खड़े 

दूर दूर तक धूल उड़े 

पथिक कहाँ विश्राम करे 

जग बदला तो मौसम बदला 

पावस में अब पड़ता सूखा

तापमान हुआ परवर्तित 

पशु नर नारी हुए व्यथित 

पर हाय मानव तू न बदला 

गौतम बुद्ध, संत ज्ञानेश्वर 

गुरु समर्थ और शिर्डी के साईं 

मान दिया सम्मान दिया 

पेड़ों की महिमा बढ़ाई

देव समान सम्मान हमारा 

सबने मिल महिमा गायी

अब मैं बूढ़ा हो चुका

पर है चिंता भारी 

जाना तो सबको एक दिन 

मेरी भी तैयारी 

छाँव में तब मेरी बैठकर 

शिक्षा कोई कैसे पायेगा 

मिला था जिन्हें दिव्य ज्ञान 

ऐसा योगी कब आएगा 

भटके हुए पथिकों को 

जीने की राह दिखायेगा 

दूषित मन कटते वन 

पर्यावरण संरक्षा को 

ये खतरा महा भारी 

काहे चलाते आरी मुझ पर 

जब पूजत हैं श्रद्धा से नर नारी 

पड़े जरूरत काटो मुझको 

इससे हमें इनकार नहीं 

बिना जरूरत काटोगे हमको

तो तुम से बड़ा गद्दार नहीं 

एक के बदले पांच लगाना 

इससे कम स्वीकार नहीं 

शायद मुझमें  औषध गुण था 

इसीलिए था मैं बच पाया 

ऐसे ही तुम भी बनना 

ऐसे ही पेड़ लगाना 

शायद कोई योगी आकर 

फिर तेरा मान बढ़ाये 

सार्थक हो नाम "प्रदीप" तेरा 

अगली पीढ़ी को सुख दे जाये. 


 

 

 

 

 

Views: 650

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sarita Sinha on April 11, 2012 at 10:30pm

adarniy kushwaha ji, sadar namaskar,

bahut sundar soch hai. koi gun kama sakein tabhi hamari pahchan hai vrna janm lena bekar hai.....

anukarniy vichar...

Comment by अश्विनी कुमार on April 11, 2012 at 8:05am

आदरणीय प्रदीप जी सादर अभिवादन ,,,अति सुंदर भावभिव्यक्ति प्रवाह भी लगभग सध रहा है.......सादर 

Comment by satish mapatpuri on April 11, 2012 at 12:50am

ऐसे ही तुम भी बनना

ऐसे ही पेड़ लगाना

शायद कोई योगी आकर

फिर तेरा मान बढ़ाये

सार्थक हो नाम "प्रदीप" तेरा

अगली पीढ़ी को सुख दे जाये

बहुत खूब प्रदीप जी ............ बहुत ऊँचे भाव ........ दाद कुबूल फरमाएं

Comment by वीनस केसरी on April 11, 2012 at 12:20am

पेड़ की पीड़ा ने व्यथित किया, रचना का उद्देश्य पूरा हुआ, बधाई स्वीकारें

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 10, 2012 at 9:08pm

आदरणीय सिंह साहब जी, सादर अभिवादन.

आप और शशि  जी वह भाई वाह. रचना अपने आप पवित्र हो जाती है. धन्यवाद. 
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 10, 2012 at 6:47pm
आयेगा जरूर कोई योगी मन भाए रे! 
पेड़ का भी मान बढ़ाये बढ़े छाए रे!
प्रदीप जी दीप जलाएं, ज्ञान  की ज्योति फैलाएं,
जवाहर भी जगमगाये, झिलमिलाये रे!
बहुत ही करुण पर  सन्देश परक रचना आदरणीय कुशवाहा जी! बधाई!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Tuesday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service