For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कलियुग में भी सतयुग !

सुना है
सभ्यता सबसे पहले
यहीं आई,
पड़ी है अब खंडहरों सी
पिछवाड़े में जमीन्दोस है
खुदाई में दिखती है
शर्म खरपतवार सी
बेशर्मी की
हरीभरी क्यारियों में
अपने वजूद को रोती है
इंसानियत
चेहरों की हवाइयों सी उड़
उलटी जा लटकी
अँधेरी सुरंग में

सच तो अब
पन्नो में ही पलता है
इंसान
मरने से पहले
जिन्दा जलता है
रिअलिटी का तो अब,
सिर्फ शो होता है
परिवार तो
हम और
हमारे दो होता है
मातृत्व यहाँ
दूर खड़ा रोता है
माँ-बाप की जगह
सास-ससुर ने ले ली
भाई बहन तो अब
साला-साली है
बुजुर्गों की जगह
आश्रम में खाली है
फ्रिज, कूलर, मोटर, बंगला
सब है, मगर;
इंसानियत
कुत्तों ने पाली है
शराफत
यूज एंड थ्रो जानी जाती है
केवल मौकों पर ही
नज़र आती है

वो कहते हैं
भैया योग करो
हरी पत्तियों का
उपभोग करो
थोडा भजन करो
सत्य को जानो !
इश्वर को पहचानो !
परम ज्योति के
दर्शन होंगे
कौन समझाए?
भूखे पेट
भजन कैसे गायें ?
पेट के अँधेरे को
कैसे जगमगायें ?
पलदारी में
पीठ अन्न ढ़ोती है
आंतें सुन्न रोती है
बच्चों की कमीज़ फटी है
आंतें पीठ से सटी है
नारों के भजन सुनते हैं
भूख का योग करते हैं
भूखे पेट
नींद भी आँखें चुराती है
हमे तो रोटी ही
सत्य नज़र आती है
भरा हो पेट तो
कलियुग में भी
सतयुग के दर्शन कराती है
अंधरों में भी
पूनम का
चाँद नज़र आती है

*******

Views: 538

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sanjay Kumar Singh on August 28, 2010 at 5:33pm
kalyug aur satyug sab yahi par dikh jata hai, achchi rachna hai,dhanyavaad,

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 28, 2010 at 5:02pm
माँ-बाप की जहग
सास-ससुर ने ले ली
भाई बहन तो अब
साला-साली है
बुजुर्गों की जगह
आश्रम में खाली है
फ्रिज, कूलर, मोटर, बंगला
सब है, मगर;
इंसानियत
कुत्तों ने पाली है

रिश्तों के नए गूंथते ताने बाने का बहुत ही सुन्दर विश्लेषण|

नारों के भजन सुनते हैं
भूख का योग करते हैं
तथाकथित सभ्य समाज का कच्चा चिटठा खोलती हैं ये पंक्तियाँ|
एक सार्थक कविता है|
एक दो जगह वर्तनी की तथा एक जगह व्याकरण की त्रुटियाँ दूर कर लें|
Comment by आशीष यादव on August 28, 2010 at 5:00pm
व्यास जी प्रणाम,
आज की दुनिया मुखरित हो रही है| आपने सारा सत्य उड़ेल कर रख दिया है| हकीकत भी बिलकुल यही है|
Comment by Kanchan Pandey on August 28, 2010 at 2:26pm
Achchi aur dil ko chhuti hui kavita lagi, thx

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 28, 2010 at 10:25am
वोह! सत्य को नंगा करती एक बेहतरीन काव्य कृति, सभ्यता खुदाई मे मिलती है, भाई बहनों का जगह साला साली ने ले ली है और पोल्दारों की पीठ अन्न ढोती है पर उनकी अतडिया सुन्न रहती है, क्या बेहतरीन सोच और दूरदर्शिता है, शायद इसी दूरदर्शिता पर किसी ने कहा होगा की जहा न पहुचे रवि वहा पहुचे कवि, इसी कथन को सत्यार्थ करती हुई रचना, बहुत बहुत बधाई नरेन्द्र व्यास जी इस अनुपम कृति के लिये,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
19 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
19 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
19 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
20 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
20 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
20 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
20 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service