For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हाल- ए- दिल ऊंचे महलों से पूछो जरा,
मस्तियाँ बादलों की कैसी उन्हे लगती हैं,

जब सावन की पहली पड़ती फुहार,
धरा ख़ुशी से सोंधी खुशबू बिखेरती,
बच्चे उछलते कूदते मचलते खेलते,
चेहरे किसानो के उम्मीदों से चमकते,

हाल- ए- दिल झोपड़ियो से पूछो जरा,
आंशु बन बारिश छपरों से टपकती है,

खूब बारिश हुई भरी नदिया और ताल ,
मचलती तितलियाँ भी आँचल संभाल,
हवाओं को भी देखो चलती मदभरी,
दीवाना बनाने को हमें हठ पर अड़ी,

हाल- ए- दिल उन बस्तियों से पूछो जरा,
जिन्दगी जिनकी किनारों पर गुजरती हैं,

जवान होती है शहरो की नशीली रात ,
आँखों आँखों में कटती कही काली रात,
तेज धुन पर कही आहा करते है लोग ,
भय के कारण कही आह करते है लोग,

हाल- ए- दिल भूखे बच्चों से पूछो जरा,
गीले चूल्हों मे जब भींगी लकड़ियाँ जलती है,

Views: 3040

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 10, 2010 at 2:59pm
जब सावन की पहली पड़ती फुहार,
धरा ख़ुशी से सोंधी खुशबू बिखेरती,
बच्चे उछलते कूदते मचलते खेलते,
चेहरे किसानो के उम्मीदों से चमकते,

वाह गणेश भाई वाह....जीय भाई जीय...ज़ोरदार,जानदार,तगड़ा,धमाकेदार रचना है गणेश भाई.....लगे रहिए...सिलसिला रोकना नही है ....
Comment by Rash Bihari Ravi on August 10, 2010 at 2:55pm
हाल- ए- दिल भूखे बच्चों से पूछो जरा,
गीले चूल्हों मे जब भींगी लकड़ियाँ जलती nahi hain

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service