For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्या इसी को मुहब्बत कहते है

क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं
जब हम बैचेन से रहते हैं
अक्सर कुछ कहने की चाह मे
सपनों मे खोये रहते हैं
क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं
 
उनकी एक झलक पाने के लिए
हम हर दिन राहों मे इंतजार करते हैं
न जाने क्यों हम कुछ कहने से डरते हैं
क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं
 
अक्सर वो सपनों में आती है
आँखें खोलूँ तो न जाने कहाँ चली जाती है
सिर्फ इन आँखों को उसकी ही सूरत भाती है
क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं

Views: 397

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Bishwajit yadav on July 30, 2011 at 12:43pm
Thanks sanjay jee,satish jee,saurabh jee,ganesh je aap log ke comant pada ke aacha laga thanks.....
Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on July 27, 2011 at 7:03pm

आप की रचना सुन्दर है !

विश्वजीत बाबू आगे बढ़ो आप सही जा रहे हो , अभी तो दिल-लगी सुरु हुई है जो आगे जाके दिल की लगी बनेगी और एक दुसरे से  कभी  एकरार कभी तकरार सुरु होगा,बहुत से वादे बने, बिगड़ेंगे  और बहुत से ऐसे मोड़ आयेंगे जाहाँ से मुडना,मुडकर चलना आप को हल्का/और बहुत भारी महसूस होवेगा तब आपके जिंदगी के मायने बदलेंगे , और आप को सही प्यार की पहचान हो जायेगी ,

प्रिय विश्वजीत प्यार की भावना से दूषित मन / और करना महापाप होता है ! आप ने जो रचना लिखी है ,वह सुन्दर है ! अभी आप छात्र है ! अभ्यास में मन लागाईए  ! और खुद की एक पहचान बनाओ क्यूंकि यह समय हाँथ से फिसला तो फिर वापस नहीं आयेगा..............................आप की सुन्दर रचना के लिए आप को धन्यवाद......... 

Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on July 27, 2011 at 7:03pm

आप की रचना सुन्दर है !

विश्वजीत बाबू आगे बढ़ो आप सही जा रहे हो , अभी तो दिल-लगी सुरु हुई है जो आगे जाके दिल की लगी बनेगी और एक दुसरे से  कभी  एकरार कभी तकरार सुरु होगा,बहुत से वादे बने, बिगड़ेंगे  और बहुत से ऐसे मोड़ आयेंगे जाहाँ से मुडना,मुडकर चलना आप को हल्का/और बहुत भारी महसूस होवेगा तब आपके जिंदगी के मायने बदलेंगे , और आप को सही प्यार की पहचान हो जायेगी ,

प्रिय विश्वजीत प्यार की भावना से दूषित मन / और करना महापाप होता है ! आप ने जो रचना लिखी है ,वह सुन्दर है ! अभी आप छात्र है ! अभ्यास में मन लागाईए  ! और खुद की एक पहचान बनाओ क्यूंकि यह समय हाँथ से फिसला तो फिर वापस नहीं आयेगा..............................आप की सुन्दर रचना के लिए आप को धन्यवाद......... 

Comment by satish mapatpuri on July 27, 2011 at 12:53am

उनकी एक झलक पाने के लिए
हम हर दिन राहों मे इंतजार करते हैं
न जाने क्यों हम कुछ कहने से डरते हैं
क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं

जुबां खामोश रहती है नज़र से बात होती है.बिश्वजीत जी ,प्यार को पहचान गए हैं आप,सुन्दर रचना -बधाई हो.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 26, 2011 at 9:39pm

"क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं??"

-- अब बाकी क्या रहा पूछने को? ..  प्रयासरत रहें. ... शुभकामनाएँ


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 26, 2011 at 9:19pm

क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं
जब हम बैचेन से रहते हैं
अक्सर कुछ कहने की चाह मे
सपनों मे खोये रहते हैं
क्या इसी को मुहब्बत कहते हैं

 

हाँ भाई हाँ , इसी को मुहब्बत कहते है, अच्छी रचना, सुंदर प्रस्तुति, बधाई आपको | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
yesterday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service