For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा 

ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा 

ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहीं

कोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं 

ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा है 

जब तक जिंदा हूँ चलना है, बस यायावर ही रहना है 

जब सबने हांथ बाढ़ाया था, तब मैंने हीं ठुकराया था 

अपने पथ का चुनाव किया, मैंने सूख का परित्याग किया 

हाव भाव से फक्कर हूँ, घुल जाऊँ तो शक्कर हूँ 

स्वाद मेरा पहचान गया, जो मेरे मन को जान गया 

मैं अपनी धुन में रहता हूँ, बस अपने मन की करता हूँ 

सुन लेता हूँ जो कहते हैं, पर मूंह से कुछ ना कहता हूँ   

जो लोग मुझे समझाते है, लोक लाज बतियाते हैं 

अपने मन के एक कोने में, मेरे जीवन को ललचाते हैं 

मैंने हीं दुनिया देखी है, हर आंच पर रोटी सेकी है

चाहे तन मेरा साफ ना हो, पर मन में अब भी नेकी है 

हम जहां कहीं बस जाते हैं, जो मिल जाता है खाते है 

पर अपनी लालच के खातिर, दूजे का हक़ नहीं खाते हैं 

बस सफर ही मेरा जीवन है, हर शहर से मेरा बंधन है

रुक गया तो मैं मर जाउंगा, ना मुक्त कभी हो पाउंगा

 

हर झांकी देखनी है मुझको, हर तुंग चढना है मुझको

जो इस जीवन मे बचा रहा, उस जीवन में है करना मुझको

रोके से मैं ना रुक पाउंगा, गृहस्थ नहीं बन पाउंगा

तुम मुझको बंधन मे ना बांधों, मैं न्याय नही कर पाउंगा

"मौलिक व अप्रकशित" 

अमन सिन्हा 

Views: 72

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जुनून-ए-इश्क़ जिसे हो कहाँ ठहरता है)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
5 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on babitagupta's blog post प्रेमचंद जी के जन्मदिन पर लेख
"आ. बहन प्रतिभा जी, सादर अभिवादन। प्रेचन्द जी पर सारगर्भित लेख हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
22 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कान्हा कहाँ गये -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१/२१२१/२२१/२१२*फिरती स्वयम्  से  पूछती  राधा  कहाँ गयेभक्तों के दुख को भूल के कान्हा कहाँ…See More
6 hours ago
Deo Shankar Navin is now a member of Open Books Online
6 hours ago
Euphonic Amit joined Admin's group
Thumbnail

ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के…See More
7 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"अवनीश धर द्विवेदी जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक आभार आपका, सादर।"
Wednesday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोईफूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लोकाम बनते ही…See More
Wednesday
Awanish Dhar Dvivedi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"बहुत सुन्दर रचना।"
Tuesday
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
Tuesday
Usha Awasthi posted a blog post

क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!लोक तन्त्र का सुख भोगेंगेचुने गए हम राजा हैंदेश हमारा, मार्ग हमारा हम ही इसके…See More
Tuesday
डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा updated their profile
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

आजादी का अमृत महोत्सव ....

आजादी के  अमृत महोत्सव के अवसर पर कुछ दोहे .....सीमा पर छलनी हुए, भारत के जो वीर । याद करें उनको…See More
Monday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service