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सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )

सिन्दूर  (क्षणिकाएँ ).....

सजावट की
नहीं
निभाने की चीज है
सिन्दूर

******

निभाने की नहीं
आजकल
सजावट की चीज है
सिन्दूर

******

छीन लिया है
अर्थ
सिन्दूर का
वर्तमान के
बदले परिवेश ने

******

प्रतीक है
दो साँसों के समर्पण की
अभिव्यक्ति का
सिन्दूर

******
आरम्भ है
एक विश्वास के
उदय होने का
माथे पर अलंकृत
चुटकी भर
सिन्दूर

सुशील सरना / 23-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 105

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 26, 2022 at 12:00pm
आदरणीय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on May 25, 2022 at 12:49pm

आद 0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सृजन,, भाव परक।बधाई स्वीकार कीजिये

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