For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सर्दीली सांझ ऐसे आई मेरे गाँव

 सर्दीली सांझ ऐसे आई मेरे गाँव

अभी अभी तो सांझ थी उतरी  
चंदा ने कुण्डी खटकाई
 
सूरज ने यों पीठ क्या फेरी
 शीत ने जैसे धौल जमाई
 
उतने जितने जतन जुटाये   
फिर भी कम्पाये  कम्पाई
 
कब तक कोई सिकुड़े-सिकुड़े
दादू ने सिगड़ी सुलगाई
 
अम्मां ने कम्बल ले खींचा
सर तक खींची ढकी रजाई
 
चूल्हे के संग पूसी चिपकी
कैसे- कैसे  पूंछ दबाई
 
कुतिया दुबकी गैया के संग  
डरी -डरी  गैया रम्भाई
 
इतना ही कम क्या था प्रभु  जी
ऊपर से बरखा बरसाई.
"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 50

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on January 24, 2021 at 3:26pm

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, हृदय तल से बधाईयाँ। सादर। 

Comment by Samar kabeer on January 24, 2021 at 2:56pm

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"वह तब से भाग रहा है;कभी पेट की खातिर,तो कभी इज्जत की खातिर।जाने कब तक भागेगा,पता नहीं।भरे पूरे घर…"
38 minutes ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । मतला बस ठीक ठीक है…"
1 hour ago
Chetan Prakash posted a blog post

पाँच बासंती दोहेः

चम्पई गंध बसे मन, स्वर्णिम हुआ प्रभात । कौन बसा  प्राणों, प्रकृति, तन - मन के निर्वात ।। धूप हुई मन…See More
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आदाब। विषयांतर्गत बेहतरीन व उम्दा प्रभावशाली रचना संवादात्मक शैली में। बहुत ख़ूब। हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"चैन स्नेचर्ज़ (लघुकथा) : सब अपने सपनों और अपनों के ही पीछे दौड़ रहे थे। कलयुग के घोर अँधकारमय अँधेर…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आ. भाई अतुल जी, अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"वाह हर रोज नये मानको के आधार पर अपनी सहूलियतों के अनुसार उत्पादों को गिराया उठाया जा रहा है मीडिया…"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"सकारात्मक भाव लिये रचना के लिये बधाई आदरणीय"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"रिश्तों की प्रगाढ़ता में बुने ताने बाने ने एक खूबसूरत रचना को जन्म दिया है। हार्दिक बधाई आदरणीय…"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"गोष्ठी का आरंभ एक सशक्त रचना से करने के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता जी। नारी को कम आँकने के दिन…"
4 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"वो दो____ मुझे नहीं पता मेरी उम्र क्या है। बरसों से यहीं हूँ।इतना याद है कि मेरे आसपास ये पार्क और…"
4 hours ago
Atul Saxena replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"प्रयास की सराहना के लिए शुक्रिया शहज़ाद भाई  ग्रुप नियमो के विषय में आगे…"
5 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service