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Mayank Sharma's Blog (5)

दुल्हन की दास्ताँ

 जो कल उन्मुक्त बेखौफ़ चलती थी

आज अकेले खामोश बैठी है

कल तक जिसका अलग अस्तित्व था

अब दुसरो से पहचान ही उसका अस्तित्व होगा

कल तक जो हर जिम्मेदारी से बचती थी

मदमस्त उल्लासित हो चहकती थी

अब दूसरो की जिम्मेदारी संभालेगी

अपनी हँसी लुप्त कर दूसरो को सँवारेगी

दुल्हन के सुर्ख लाल जोड़े में

एक बंदनी की भाँति लग रही

फ़ेरो की पवित्र अग्नि में

उसकी ख्वाहिशे सुलग रहीं          

सर पर जड़ित स्वर्ण टीका

उसके विषाद मे…

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Added by Mayank Sharma on March 27, 2011 at 3:00pm — 1 Comment

कुछ अहसास

कुछ अहसास हर अहसास से परे

 कुछ अरमान उम्मीदो से भरे

 गम है लिखे मुक्कदर में सभी

केमहबूब का साथ हर गम हरे



किताब की लिखावट तो नीरस

हैशब्दों की बनावट भी नीरस है

गुलाबों सा महकता महबूब का प्रेम पत्र

लिये जिंदगी का हर रस है  



दुनिया में अस्तित्व हीन हूँ

सनम ही मेरी दुनिया है

 उसी में डुबा रहूँ ताउम्र 

सनम ही मेरा अस्तित्व हैं

 

मिलन यामिनी में साथ बैंठे

खुला आसमा ताकते है

चाँद को…

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Added by Mayank Sharma on February 15, 2011 at 3:30pm — No Comments

लफ़ंगे परिंदे

यौवन आते ही उन्मुक्त हो उठे

उन्माद में भयमुक्त हो उठे

जमीं से कहा उगे थे जो

आसमा से उँचे हो उठे

 

पहली आजादी के अहसास से

खुलेपन की सास से

चलना कहा सिखा था

गिर पड़े उड़ने के कयास से

 

हवाओं से बाते करते थे

रफ़्तारो से मुलाकातें करते थे

कब मौत ने जिंदगी को पछाड़ दिया

हम तो आपसी हौड़ लगाया करते थे

 

फ़िक्र को धुआ करने मे

सूखे कंठ में मिठास भरने मे

कश लगाया पहली बार

हर…

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Added by Mayank Sharma on January 16, 2011 at 2:19pm — No Comments

युवा मन की उलझन

मन मे हो रही एक…

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Added by Mayank Sharma on December 31, 2010 at 1:59pm — No Comments

एक मासूम से अनोखी मुलाकात

रास्ते से गुजर रहा था

  ख्यालों में खोया हुआ

कुछ सपने बुन रहा था…

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Added by Mayank Sharma on December 30, 2010 at 10:31pm — No Comments

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