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Bhupender singh ranawat's Blog (4)

मेरा सपना

कल नींद में हमने एक सपना देखा।

देखा कि ,मेरा देश बदल गया है।।

जाति ,धर्म का नहीं है रगड़ा

ऊंच-नीच का खत्म है झगड़ा।।

नारी का नहीं है शोषण,

गरीब को भरपूर है पोषण।

सब के, भंडार भरे हैं,

निठल्ले भी काम करें हैं।

ना अपराधों की कही है गंध,

थाना ,कचहरी सब है बंद।

नेता सब सुधर गए हैं,

भ्रष्टाचारी ना जाने किधर गए हैं।

ना रिश्वत है ,ना चित्कार कहीं,

है शांति चहु ओर,

पर जब नींद खुली तो देखा, हकीकत है कुछ और।।



द्वारा भूपेंद्र… Continue

Added by Bhupender singh ranawat on March 29, 2020 at 10:15am — 1 Comment

कोरोना पर जीत मंत्र

आप अपने आप को ,कर लो घर में बंद।
फिर खुशियां ही खुशियां है, मुश्किल के दिन चंद।।

सेनीटाइजर या साबुन से, धो लो अपने हाथ।
ज्यादा गर याद आए अपनों की, तो फोन पर कर लो बात।।

हम सबको मिलकर लड़नी है, कोरोना की लड़ाई।।
एक दूजे से दूरी ही ,इसकी है दवाई ।।

कानून तुम मान लो ,सुने कर दो रास्ते ।।
हेलो हाय छोड़ के, बस करो नमस्ते ।।

दाल रोटी से काम चला लो, छोड़ो तुम मेवा ।।
घर पर रहकर कर लो, देश की सेवा।।
द्वारा भूपेन्द्र सिंह राणावत

Added by Bhupender singh ranawat on March 26, 2020 at 7:48pm — 1 Comment

मानव तेरी करनी

विवेक पर जब मन हावी हो जाता है,

तभी तो ऐसा मंजर नजर आता है।

हे मानव, तू अड़ा रहा मनमानी पे,

किया निरंतर खिलवाड़ प्रकृति से।

हे अधम, प्रगति के मद में,

तूने प्रकृति का तिरस्कार किया।

बस, मैं ही मैं हूं ,तू इस खुश फहमी में जिया।

पर, मत भूल, प्रकृति जब विकराल रूप धर लेती है,

फिर वह सांसे भी हर लेती है।

अब भी समय है, हे मानव ,संभल जा,

अपनी हरकतों से बाज आ।



सुन, ए नादान ,गर जीना है सुकून से,

तो प्रकृति की शरण में जा।

वो मां है,… Continue

Added by Bhupender singh ranawat on March 25, 2020 at 2:11pm — 1 Comment

इंतज़ार

मुद्दत से इंतजार में बैठे थे हम जिनके ,

वो आये भी तो अजनबियों कि तरहां।

के तोड़ गये अरमानो के घरोंदों को वो ऐसे,

उजाड़ देती है खिज़ा गुलशन को जिस तरहां।

बेहाल दिल हे और रूह भी हमारी ,

बहता है दर्द जिस्म में अब ऐसे

जैसे मचलता हे पानी दरिया में जिस तरहां।

के अश्क़ अब बहते नहीं इन आँखों से,

बस आहें ही निकलती हे अब सांसो से ।

ज़िन्दगी हमारी अब हो गई हे कुछ ऐसे,

जैसे खाती हे नाव हिलोरे तूफां में जिस तरहां।

अब   ना…

Continue

Added by Bhupender singh ranawat on January 12, 2020 at 11:28am — 2 Comments

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