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Manoj kumar Ahsaas's Blog – April 2017 Archive (1)

ग़ज़ल मनोज अहसास

1222 1222 1222 1222





कभी चंदा, कभी सूरज,कभी तारे संभाले हैं

सुखनवर के नसीबो में मगर पांवों के छाले हैं



हमारी बेगुनाही का यकीं उनको हुआ ऐसे

वो जिनको चाहते हैं अब उन्हीं के होने वाले हैं



मेरी भूखी निगाहों में शराफत ढूंढने वाले

तेरी सोने की थाली में मेरे हक़ के निवाले हैं



हमारी झोपडी का कद बहुत ऊंचा नहीं लेकिन

तेरे महलों के सब किस्से हमारे देखे भाले हैं



भरी महफ़िल में आके पूछते हैं हाल मेरा वो

तकल्लुफ भी निराला… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on April 2, 2017 at 3:17pm — 18 Comments

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