For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Mamta gupta's Blog (4)

ग़ज़ल

मुझ को मेरी मंज़िल से मिला क्यूँ नहीं देते

आख़िर मुझे तुम अपना पता क्यूँ नहीं देते

जज़्बात के शोलों को हवा क्यूँ नहीं देते

तुम आग मुहब्बत की लगा क्यूँ नहीं देते

जब आप को बे इंतिहा मुझ से है मुहब्बत

फिर हाथ मेरी सम्त बढ़ा क्यूँ नहीं देते

जो बन के सितारे हैं रवां आँख से आँसू

ये ज़ीस्त की ज़ुल्मत को मिटा क्यूँ नहीं देते

जो…

Continue

Added by Mamta gupta on October 12, 2024 at 11:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल_

2122 1122 1122 22

आँख से अश्कों का दरिया तो बहाया हमने

राज़-ए-दिल पर न किसी से भी बताया हमने

उन का हर एक सितम हँसते हुए सह डाला

इस तरह रस्म-ए-मुहब्बत को निभाया हमने

शम्मा उल्फ़त की जो तुम ने थी जलाई दिल में

उस को बुझने से कई बार बचाया हमने

हैफ़ उस ने ही न की क़द्र वफ़ाओं की मेरी

जिस की उल्फ़त में ही दुनिया को भुलाया हमने

नक़्श मिटते ही नहीं दिल से मुहब्बत के तेरी

कितनी ही बार मगर इन को मिटाया…

Continue

Added by Mamta gupta on July 30, 2024 at 9:10pm — 2 Comments

गजल

बह्र-2122 2122 2122 212

काफ़िया- गुमरही "ई" स्वर

रदीफ़-"क्या चीज़ है"



ग़ज़ल-



समझा राहे-दिल से हट कर गुमरही क्या चीज़ है।

बे सरो-पाई है क्या और बे घरी क्या चीज़ है।।



प्यार रब की बन्दगी है प्यार रब की है रज़ा।

प्यार से बढ़ कर जहाँ में दूसरी क्या चीज़ है।।



ख़ुश्क होठों पर ये रखते हैं तराने प्यार के।

आशिक़ों से पूछ लो दीवानगी क्या चीज़ है।।



उनको छेड़ा इक ज़रा तो हो गया चेहरा गुलाल।

खुल गया मुझ पर उभरती रौशनी क्या चीज़… Continue

Added by Mamta gupta on July 13, 2024 at 11:28am — 5 Comments

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते

वो किसी के हुआ नहीं करते



नेमतें पा के लोग क्युं आख़िर

शुक्रे ख़ालिक़ अदा नहीं करते



राहे हक़ पर जो गामज़न हैं बशर

वो किसी का बुरा नहीं करते



दिल मेरा ग़मज़दा नहीं होता

वो जो मुझसे दग़ा नहीं करते



जाने क्या हो गया है अब उनको

मुझसे हँस कर मिला नहीं करते



याद आती नहीं अगर उन की

हम कभी रत-जगा नहीं करते



लाख कोशिश करो मिटाने की

नक़्शे उल्फ़त मिटा नहीं करते



ज़ुल्म से 'नाज़'… Continue

Added by Mamta gupta on June 22, 2021 at 1:22pm — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service