For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Annapurna bajpai's Blog (73)

मेरे पिता

याद आ गया फिर

मुझे मेरा बचपन ,

पिता  की उंगली थामे,

नन्हें कदमों से नापना,

दूरियाँ, चलते चलते ,

वो थक कर बैठ जाना ,

झुक कर फिर पिता का ,

मुझको गोदी उठाना ,

चलते चलते मेहनत का,

पाठ वो धीरे से समझाना ।

 

बच्चों पढ़ना है सुखदाई,

मिले इसी मे सभी भलाई,

पहले कुछ दिन कष्ट उठाना,

फिर सब दिन आनंद मनाना,

फिर आ गया याद, 

 उनका ये  गुनगुनाना ,

सिर पर वो उनका हाथ,

भर देता है मुझमे…

Continue

Added by annapurna bajpai on July 22, 2013 at 6:30pm — 13 Comments

प्रिय तुम ही

सूरज की रश्मियों मे ,

चमक बन के रहते हो ।

जाग्रत करते सुप्त मन प्राण ,

सुवर्ण सा दमके  तन मन । 

चन्द्रमा की शीतलता मे ,

धवल मद्धम चाँदनी से तुम,

अमलिन मुख प्रशांत हो ।

सागर से गहरे हो तुम ,

कितना कुछ समा लेते हो ।

नूतन पथ के साथी ,

जीवन तरंगो के स्वामी ।

मन हिंडोल के बीच ,

सिर्फ तुम किलोल कालिंदी । .

सुनो प्रिय तुम ही ,

तुम ही .....प्रिय तुम ही ।..... अन्नपूर्णा…

Continue

Added by annapurna bajpai on July 9, 2013 at 8:30pm — 9 Comments

टूटते रिश्तों की किरचें

 

टूटे रिश्तों की किरचियाँ ,

कभी जुड़ नहीं पातीं ,

शायद कोई जादू की छड़ी ,

जोड़ पाती ये किरचियाँ ।

.

ये चुभ कर निकाल देतीं हैं ,

दो बूंद रक्त की , और अधिक

चुभन के साथ बढ़ जाती है ,

पीड़ा न दिखाई देती हैं ।

.

चुप रह कर सह जाती हूँ ,

आँख मूँद कर देख लेती हूँ ,

शायद कोई प्यारी सी झप्पी ,

मिटा पाती ये दूरियाँ। .... अन्नपूर्णा बाजपेई

 

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

Added by annapurna bajpai on July 9, 2013 at 8:30pm — 6 Comments

हे ! इस जगदीश

(1)

 

ये ईश का दरबार है ,

खुश रंग गलीचे बिछे है ।

अंबर का है तम्बू तना है ,

रवि चन्द्र तारे जगमगाते ।

कैसी ये मौजे बहार है ॥

 (2)

नदियों मे बहता नीर है ,

वायु का वेग गंभीर है ।

सागर की है अनुपम छटा ,

जहां रत्न का  भरा भंडार है।।

(3)

न्यायकारी निर्विकारी ,

तू जगत करतार है ।

तेरी महिमा अति अगम ,

नहीं जिसका पारावार है ॥

(4)

इकरार नहीं पूरा किया ,

ज्यो किया गर्भ मे…

Continue

Added by annapurna bajpai on July 1, 2013 at 6:00pm — 2 Comments

हरी भरी धरती

हरी भरी धरती मन मोहती है ,

चहुं ओर फैली हरियाली मोहती है ,

मुसकुराते खिले कुसुम मोहते हैं,

झूमते पेड़ पौधे मन मोहते है ।

 

अद्भुत है धरती का सौंदर्य ,

कल कल करती नदिया बहती ,

चम चम करते पोखर तालाब ,

अद्भुत अनुपम धरा है दिखती।

 

किन्तु .....................

ऐ! धरती पुत्र आज तो ,

धरती माँ न ऐसी दिखती है,

टप टप गिरते आँसू बस रोती है,

मेरा श्रंगार करो बस ये ही कहती है।

 

किन्तु आज…

Continue

Added by annapurna bajpai on June 6, 2013 at 8:00am — 18 Comments

चुल्लू भर पानी ( लघु कथा )

 चुल्लू भर पानी

 

चिलचिलाती धूप मे भी तेरह –चौदह वर्षीय किशोर सिर पर मलबे से भरी टोकरी उठाए बहुमंज़िली इमारत से नीचे उतर रहा था । उतरते उतरते उसे चक्कर आने लगा उसने सुबह से कुछ खाया नहीं था । उसके घर मे कोई बनाने वाला नहीं था , उसकी माँ बहुत बीमार थी उसके लिए दवा का बंदोबस्त जो करना था उसी के वास्ते वह काम करने आया था । चक्कर आने पर वह वहीं सीढियों पर दीवाल से सिर टिका कर…

Continue

Added by annapurna bajpai on June 3, 2013 at 6:30pm — 5 Comments

अनोखा रिश्ता सास का

तपते रेगिस्तान मे पानी की बूंद जैसी,

उफनती नदी के बीच कुशल खिवैया सी ।

ससुराल मे तरसती बहू के लिए माँ सी ,

तमाम गलतियों के बीच समाधान सी ।

 …

Continue

Added by annapurna bajpai on June 3, 2013 at 4:30pm — 11 Comments

त्रिशंकु मन

शंक निशंक त्रिशंकु मन,

मचि रही उथल पुथल,

जीत हार का फेर करत

उठा पटक यह त्रिशंकु मन।

 

अंतर्द्वंद  हिंडोल के बीच,…

Continue

Added by annapurna bajpai on May 30, 2013 at 5:30pm — 4 Comments

मन मूरख

मान मान मन मूरख मेरे,

मत फंस विषय जाल मे,

जो सुख चाहे भाग विषयन से,

मत इन फंद फंसे री ।

जनम जनम नहि इनसे उबरें,

ताते ध्यान धरे…

Continue

Added by annapurna bajpai on May 29, 2013 at 8:30am — 7 Comments

अज्ञान तिमिर

आकंठ डूबे हुये हो क्यों,

अज्ञान तिमिर गहराता है।

ये तेरा ये मेरा क्यों ,

दिन ढलता जाता है।

 

क्यों सोई अलसाई  अंखियाँ,

न प्रकाश पुंज दिखाता है ।

जीवन मरण का फंदा ,

आ गलमाल बन लहराता है।

 

तब क्यों रोते हो,

जब सब छिनता जाता है।

खोलो ज्ञान चक्षु औ,

हटा दो तिमिर घनेरा।

फैले  पुंज प्रकाश का ,

होवे  दर्शन नयनाभिराम।

 

 

(अप्रकाशित एवं मौलिक)

Added by annapurna bajpai on May 26, 2013 at 12:00pm — 9 Comments

नाथ तुमरी लीला अनुपम

नाथ तुम अनुपम जाल बिछायो,

जगत को यहि मे भरमायो।

गरभवास मे करी प्रतिज्ञा,

यहाँ पर करि बिसरायो।

 

मातु पिता की गोदी खेलि के,

बाला पनहि बितायो ।

ज्वान भयो नारी घर आई,

तामे मन ललचायो।

 

सुंदर रूप देखि के भूल्यो,

जगत्पिता बिसरायो।

प्रौढ़ भए पर सुत औ नारी,

लई अंग लपटायो ।

 

आशा प्रबल भई मन भीतर,

अनगित पाप करायो।

पुण्य कार्य नहीं एकहु कीन्हे,

चारो पनहि बितायो…

Continue

Added by annapurna bajpai on May 26, 2013 at 12:00pm — 7 Comments

नेह की पाती

मेरी नींदों मे ख्वाब बन कर रहते थे,

वो तुम ही तो थे ,

जिसके सपने मेरी आँखों ने सँजोये थे,

वो तुम ही तो थे ,

जो रहता था मेरे दिल की किसी ,…

Continue

Added by annapurna bajpai on April 16, 2013 at 4:00pm — 8 Comments

समझ न पाती...

वो नन्ही नन्ही सी गोल मटोल,

आंखे इधर उधर निहारती ,

कुछ तलाशती सी लगती ,

न पा सकने की स्थिति,

समझ न पाती .............

 …

Continue

Added by annapurna bajpai on April 11, 2013 at 9:00am — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी नहीं.. चर्चा जारी रहे।  'अभी' अलविदा ना कहना.. "
16 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय सौरभ भाई, आप ने सभी बातें सविस्तार कही और अनेकों संशयों को समाप्त किया। इसके पश्चात और कुछ…"
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"यह डेटाबेस तक पहुंच का प्रश्न है। सामान्यतः पोर्टल सर्विसेज एजेंसी साइट ओनर को डेटाबेस तक पहुंच…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता ’अजेय’ जी, आपकी संलग्नता आश्वस्तिकारी है. आपका सोचना आपके पहलू से…"
22 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"इस सारी चर्चा के बीच मैं एक बात और कहना चाहता हूँ। जैसा कि हम सबने देख लिया कि सदस्य इस मंच के लिए…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जी आदरणीय "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service