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Ram Awadh VIshwakarma's Blog – November 2017 Archive (3)

ग़ज़ल - ज़माना खराब है

मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन



हर सू है मारधाड़ ज़माना ख़राब है।

खोलो नहीं किवाड़ ज़माना ख़राब है।



गुन्डों को सीख दे के मुसीबत न मोल लो,

ये देंगे घर उजाड़ ज़माना ख़राब है।



ले दे के अपना काम कराओ किसी तरह

कर लो कोई जुगाड़ ज़माना ख़राब है।



बच्चे भी तंज कसते हैं मुझ पर अदा के साथ,

हँसते हैं दाँत फाड़ ज़माना ख़राब है।



पहले कभी हमारे भी क्या ठाठ बाट थे,

अब झोंकते हैं भाड़ ज़माना खराब है।



अब दो टके में भी न कोई पूछता मुझे,

मैं… Continue

Added by Ram Awadh VIshwakarma on November 28, 2017 at 10:50pm — 11 Comments

ग़ज़ल- अभी तक शख्स वो जिन्दा है साहब

मफाईलुन मफाईलुन फऊलुन

1222 1222 122





अभी तक शख्स वो जिन्दा है साहब।

निडर होकर जो सच कहता है साहब।



सभी हैं अपनी अपनी जिद पे कायम,

किसी की कौन अब सुनता है साहब



झगड़ने का कोई मुद्दा नहीं है,

यहाँ बेबात का झगड़ा है साहब।



बचाने को हमें ठिठुरन से सूरज,

बहुत दिन बाद फिर निकला है साहब।



ग़रीबी मुल्क से जायेगी अब तो,

सभी अखबार में चर्चा है साहब।



बुजुर्गों से बहुत आगे हैं बच्चे,

जमाना कुछ न कुछ बदला है… Continue

Added by Ram Awadh VIshwakarma on November 20, 2017 at 2:53pm — 5 Comments

ग़ज़ल - जानवर कितने समझदार मिले

बह्र- फाइलातुन मुफाइलुन फैलुन

2122 1212 22



शेर की खाल में सियार मिले।

जानवर कितने समझदार मिले।



मुझसे जो दूर दूर रहते थे,

जब पड़ा काम बार बार मिले।



जिनकी किस्मत में सिर्फ बीड़ी है,

उनके होठो पे कब सिग़ार मिले।



हर किसी की यही तमन्ना है,

देश में सबको रोजगार मिले।



कैसी हसरत है नौजवानों की,

उनको शादी मैं मँहगी कार मिले।



उसने टरका दिया हमें हर बार,

उससे दफ्तर में जितनी बार मिले।



अपनी किस्मत… Continue

Added by Ram Awadh VIshwakarma on November 3, 2017 at 10:39pm — 14 Comments

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