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Akhand Gahmari's Blog – September 2014 Archive (4)

रहने दो

तुम्‍हारी झील सी आँखे मुझे बस डूब मरने दो

न रोको तुम कभी मुझको मुझे बस प्‍यार करने दो



तुम्‍हारे बिन ये जीवन है जैसे फूल बिन धरती

मरे हम भी तुम्‍हारे पर मगर तुम क्‍यों नहीं मरती

बडा सूना पडा जीवन प्‍यार के रंग भरने दो

न रोको तुम कभी मुझको मुझे  बस प्‍यार करने दो

तुम्‍हारी झील सी आँखे मुझे बस डूब मरने दो



तुम्‍हारे पाव की पायल मुझे हरदम  सताती है

निगाहे रात दिन तुमको न जाने क्‍यो बुलाती है

छुपाना मत कभी ऑंखे मुझे पलको पे रहने दो

न रोको तुम कभी…

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Added by Akhand Gahmari on September 18, 2014 at 8:00pm — 4 Comments

सो जाता

हमें भी जिन्‍दगी से प्‍यार हो जाता।।।

हमारे प्यार मे गर कोई खो जाता

शिकायत भी नहीं उनसे दोष मेरा है

निभाते प्‍यार गर हम तो न वो जाता

तड़पता ही रहूँगा रात भर क्‍या मैं

मिलन की अास गर भी होती  सो जाता

न पाये रूह उसकी चैन जन्‍नत में

दिखा सपने सुहाने छोड़ जो जाता

बहे जो आज नफरत की हवा जग में

मिटा मैं काश नफरत प्‍यार बो जाता

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on September 11, 2014 at 3:45am — 5 Comments

हमारे दर्द को दुनिया

हमारे दर्द को दुनियाँ तमाशो में न गा जाये

बजा ताली सभी झूमें हमारा दर्द भा जाये

न आये है किनारे पर अभी ठहरा समुन्‍दर है।

बड़ी खामोश लहरे हैं कहीं तूफाँ न आ जाये।।

सहेगें जुल्‍म अब कितना बड़ा जालिम हुआ हाकिम।

पड़ी थी लाश सड़को पे कफन वो बेच खा जाये।।

सभालो अब वतन अपना तबाही का दिखे मंजर

घरों में आज खुशियाँ है कहीं मातम न छा जाये

जला कर आस का दीपक न जाओ छोड़ कर हमको '

कुचलने का हमारा सिर न दुश्‍मन मौका पा जाये

मौलिक…

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Added by Akhand Gahmari on September 8, 2014 at 11:00am — 11 Comments

बीते पल

न होना दूर नज़रों से कसम हमको खिलाती थी

न दे जब साथ लब उसके इशारो से बुलाती थी



किताबों में छुपाती थी दिया हमने जो दिल उसको

बचा नज़रे सभी की वो उसे दिल से लगाती थी



चुरा नज़रे सभी की हम मिले जब बाग में इक दिन

लगा कर वो गले हमको बढ़ी धड़कन सुनाती थी



कभी आँखों मे डाले अाँख कर देता शरारत तो

चुरा कर वो नज़र हमसे जरा सा मुस्‍कुराती थी



न भूलेगे कभी हम तो बिताये साथ पल उसके

छुपा कर चाँद सा मुखड़ा हमें हरदम सताती…

Continue

Added by Akhand Gahmari on September 6, 2014 at 8:30pm — 20 Comments

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