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Sweet Panday
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Mohammed Arif commented on Sweet Panday's blog post कविता कपुतली
"प्रिय स्वीट पांडे जी आदाब, टहली बार आपकी रचना से संवाद स्थापित कर रहा हूँ । अच्छी संभावना है आपमें में । जैसा आपने नारी का चित्रण किया आज की नारी वैसी है नहीं । वह अब कठपुतली नहीं रही । वह सक्षम है, सबल है । हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर…"
Sep 12, 2017
Sweet Panday commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हाँ, तुमने प्यार सिखाया था:-मोहित मुक्त
"बहुत अच्छी कविता है"
Sep 12, 2017
पंकजोम " प्रेम " commented on Sweet Panday's blog post कविता कपुतली
"वाह दी ह्र्दयस्पर्शी कविता , मुबारक़बाद क़बूल करें"
Sep 12, 2017
Mahendra Kumar commented on Sweet Panday's blog post कविता कपुतली
"आ. Sweet Panday जी, स्त्रियों की हीन दशा को उजागर करती अच्छी कविता है. भारत की एक बहुप्रचलित प्राचीन पुस्तक में भी कुछ ऐसा ही उल्लेख है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. वैसे मुझे लगता है कि यदि आप इस पंक्ति //औरत की जिन्दगी बन गई एक…"
Sep 11, 2017
Samar kabeer commented on Sweet Panday's blog post कविता कपुतली
"अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 11, 2017
Sweet Panday posted a blog post

कविता कपुतली

औरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतलीजिन्दगी डोर कभी इस हाथ में, तो कभी उस हाथ मेंनही रहा कुछ अपने हाथ मेंबचपन की डोर मॉ बाप के हाथ मेंयौवन की डोर बंधी पति के हाथ मेंइधर नाचती उधर नाचतीपहुची जब आखिरी पडाव मेंजा पहुची बच्चों के हाथ मेंऔरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतलीसारी उमर बीत गई सोचते सोचतेक्या रहा अपने हाथ मेंसमझती रही सबके इशारेकरके हर अपने अरमान किनारेऔरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतलीसबको अपनाया सबको दुलरायाजब बेबस हुई तो दिखा न कोई सहाराबनकर कठपुतली बीता जीवन साराऔरत की जिन्दगी बन गई एक…See More
Sep 11, 2017

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for Sweet Panday
"ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....  ग़ज़ल की कक्षा   ग़ज़ल की बातें    भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है. | | | | | | | | आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते…"
Sep 9, 2017
Sweet Panday is now a member of Open Books Online
Sep 9, 2017

Profile Information

Gender
Female
City State
Kanpur
Native Place
Kanpur
Profession
TEACHER

Sweet Panday's Blog

कविता एक सवाल

कभी कभी तो लगता है,

जैसे लडकी होना एक गुनाह है,

हर कदम पर लोगों की प्यासी निगाह है,

कदम कदम पर लगती है बन्दिशे ,

हर कदम पर उठते है सवाल,

ऐसा लगता है ,

जैसे लडकी होना एक गुनाह है,

नही होता अधिकार लडकी को,

अपनी जिन्दगी के फैसले लेने का,

नही जी सकती अपनी जिन्दगी,

अपने बनाये खुद के उसूलो पर,

हर कदम पर बांध दी जाती है जजीर,

रिश्तों की मर्यादाओं की समाज के बने खोखले नियमों की,

सच में ऐसा लगता है ,

जैसे लडकी होना एक गुनाह… Continue

Posted on September 23, 2017 at 7:08pm — 4 Comments

कविता कपुतली

औरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतली

जिन्दगी डोर कभी इस हाथ में, तो कभी उस हाथ में

नही रहा कुछ अपने हाथ में

बचपन की डोर मॉ बाप के हाथ में

यौवन की डोर बंधी पति के हाथ में

इधर नाचती उधर नाचती

पहुची जब आखिरी पडाव में

जा पहुची बच्चों के हाथ में

औरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतली

सारी उमर बीत गई सोचते सोचते

क्या रहा अपने हाथ में

समझती रही सबके इशारे

करके हर अपने अरमान किनारे

औरत की जिन्दगी बन गई एक कठपुतली

सबको अपनाया सबको दुलराया

जब… Continue

Posted on September 11, 2017 at 5:07pm — 5 Comments

Comment Wall (2 comments)

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At 8:51am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:55pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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