For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Richa Yadav
Share

Richa Yadav's Friends

  • Rupam kumar -'मीत'
 

Welcome, Richa Yadav "Riya"

Latest Activity

Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका। सादर"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय अमीर जी,अभिवादन बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय दिनेश जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करिये।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय अमीर जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय रचनाजी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय नाहक़ जी नमस्कार हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया सादर।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय रचना जी नमस्कार बहुत बहुत आभार आपका। सादर।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय राजेश कुमारी जी नमस्कार बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये। सादर।"
Saturday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय sir जी, अभिवादन बहुत बहुत शुक्रिया आपका इस correction के लिए, बहुत बेहतर है। सादर।"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय कबीर sirji आपके मार्गदर्शन के बाद कुछ सुधार किये हैं गज़ल में कृपया देखियेगा। सादर। ज़ब्त पे अपने महारत भी अगर पाई होहै ज़रूरी ये कभी आँख भी भर आई हो।1 ज़िंदगी भी तो चला करती है चालें ऐसीकोई है जिसने यहाँ मुँह की नहीं खाई हो।2 ग़म ख़ुशी साथ ही…"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय समर कबीर Sirji, नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आपका इतनी बारीक़ी से ग़ज़ल की त्रुटियां बताने,समझाने के लिए पूरा प्रयास करूँगी सुधारने का। सादर।"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदणनीय सालिक जी बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का। सादर"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय Aazi जी सादर अभिवादन अच्छी गज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिये।"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय Tasqid जी सादर अभिवादन अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय संजय जी सादर अभिवादन बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए।"
Friday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"2122 1122 1122 22/112 ज़ब्त पे अपने महारत भी अगर पाई होहै ज़रूरी ये कभी आँख भी भर आईं हो।1 ज़िंदगी भी तो चला करती है चालें ऐसीकोई होगा न बशर मुँह की नहीं खाई हो।2 ग़म ख़ुशी साथ में रहते हैं इन्हीं आँखों मेंये झलकती हैं कहीं मौत या शहनाई हो।3 है बहुत…"
Friday

Profile Information

Gender
Female
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Alaahabad U.P.
Profession
home maker
About me
computer engineer by heart Shayar

Richa Yadav's Blog

ग़ज़ल-हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती।

221 2121 1221 212



हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती

करके कोई दुआ भी यूँ गाई नहीं जाती।1

दिल आपकेे है बस में ये अब जानते हैं हम

जादूगरी ऐसी भी दिखाई नहीं जाती।2

हैं दर्द-ओ-ग़म भरे हुए इतने कि क्या कहें

ये दास्तान दिल की सुनाई नहीं जाती।3

ये बदगुमानी आपकी आई है बीच में

बिगड़ी है इतनी बात बनाई नहीं जाती।4

फिर साथ होगी होली दीवाली की धूम भी

हमसे अकेले ईद मनाई नहीं जाती।5

दिल आपका दुखा तो…

Continue

Posted on December 7, 2020 at 1:29pm — 4 Comments

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

बह्र:- 221 2121 1221 212

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

मुद्दत हुई तो यार का दीदार हो गया

वो जो चला गया है मेरा शह्र छोड़ कर

लगता है ऐसा मुझको मैं बीमार हो गया

बेमोल ही रहे न किया ज़िंदगी से ग़म

तूने छुआ मुझे तो मैं दीनार हो गया

था मर्ज़ ऐसा जिसकी नहीं थी दवा कोई

तू हाथ थाम कर मेरा तीमार हो गया

तूने गले लगाया "रिया" को मेरे ख़ुदा

लगता है जैसे क़द मेरा मीनार हो गया

"मौलिक व…

Continue

Posted on October 30, 2020 at 3:30pm — 11 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"धन्यवाद लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी, मेरी तरफ़ से भी आपको और सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ परिवार के समस्त सदस्यों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..."
12 hours ago
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है…"
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"बहुत शुक्रिय: प्रिय ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"रूह के पार मुझको बुलाती रही' क्या कहने.. आ. भाई समर जी।"
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई गुरप्रीत सिंह जी आदाब, बहुत अर्से बाद ओबीओ पर आपको देख कर ख़ुशी हुई ।"
yesterday
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही वाह वाह आदरणीय समर…"
yesterday
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार। बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास आपकी तरफ से । पहले दोंनों अशआर बहुत…"
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"//रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही'"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आ. रचना बहन सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। मेरे हिसाब से मिसरा यह करें तो अधिक…"
yesterday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् सुधारने की कोशिश की है। देखें क्या सहीह है ? एक आवाज़ कानों…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई 'मुसाफ़िर' जी आदाब, सहवन बग़ैर तख़ल्लुस मक़्ते की जगह मतला टाईप हो…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service