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Welcome, Richa Yadav "Riya"

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Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय संजय जी,नमस्कार बहुत शुक्रियः आपका, आपने जो सुझाव दिए वो भी बहुत सही लगे,सुधार करती हूँ, धुआँ वाला confusion है मुझे भी, गुणीजन क्या कहते हैं देखती हूँ,आभार आपका। सादर।"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया दीपांजली जी, नमस्कार ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार कीजिए। तीसरे शेर को कुछ सुधार सकते हैं, गुरुजन बेहतर बतायेंगे। सादर।"
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदणीय संजय जी,नमस्कार बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय नवीन जी,नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221 2121 1221 212 बरसात की दुआ करे क्यों आसमाँ से हमउसको भी फ़िक्र होगी, हैं कच्चे मकाँ से हम।1 लोगों को शौक़ रहता बहुत ख़ुदनुमाई कालेकिन न कर सके कभी अपनी ज़बाँ से हम।2 मिलता नहीं है कुछ भी हमारे हिसाब काग़ुरबत में खाली हाथ ही आए दुकाँ से हम।3 बच्चों…"
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय सर जी, सादर नमस्कार।।"
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीया रचना जी अच्छी ग़ज़ल हुई है, गुणीजनों की इस्लाह से और भी निखर जायेगी,बधाई स्वीकार कीजिए। सादर"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"जी सर जी, उनका शेर बहुत ख़ूब हुआ,कई बार पढ़ा। ठीक है सर जी,शुक्रियः आपका। सादर"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय सर जी सुरख़ाब वाला शेर सहीह नहीं कर पाई हूँ फ़िलहाल, कृपया मार्गदर्शन करें सादर"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीया रक्षिता जी, नमस्कार ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार कीजिए गुणीजनों से सहमत हूँ। सादर।"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय नादिर जी, नमस्कार बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय मोहन जी,नमस्कार अच्छी कोशिश ग़ज़ल की,बधाई स्वीकार कीजिए। गुणीजनों की कही बात क़ाबिल-ए-गौर है। सादर।"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीया रचना जी बहुत शुक्रियः हौसला अफ़ज़ाई का। सादर।"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय सालिक जी बहुत शुक्रियः आपका सादर"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय नादिर जी बहुत शुक्रियः आपका। सादर"
Aug 28
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय संजय जी बहुत शुक्रियः आपका सादर।"
Aug 28

Profile Information

Gender
Female
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Alaahabad U.P.
Profession
home maker
About me
computer engineer by heart Shayar

Richa Yadav's Blog

ग़ज़ल-हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती।

221 2121 1221 212



हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती

करके कोई दुआ भी यूँ गाई नहीं जाती।1

दिल आपकेे है बस में ये अब जानते हैं हम

जादूगरी ऐसी भी दिखाई नहीं जाती।2

हैं दर्द-ओ-ग़म भरे हुए इतने कि क्या कहें

ये दास्तान दिल की सुनाई नहीं जाती।3

ये बदगुमानी आपकी आई है बीच में

बिगड़ी है इतनी बात बनाई नहीं जाती।4

फिर साथ होगी होली दीवाली की धूम भी

हमसे अकेले ईद मनाई नहीं जाती।5

दिल आपका दुखा तो…

Continue

Posted on December 7, 2020 at 1:29pm — 4 Comments

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

बह्र:- 221 2121 1221 212

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

मुद्दत हुई तो यार का दीदार हो गया

वो जो चला गया है मेरा शह्र छोड़ कर

लगता है ऐसा मुझको मैं बीमार हो गया

बेमोल ही रहे न किया ज़िंदगी से ग़म

तूने छुआ मुझे तो मैं दीनार हो गया

था मर्ज़ ऐसा जिसकी नहीं थी दवा कोई

तू हाथ थाम कर मेरा तीमार हो गया

तूने गले लगाया "रिया" को मेरे ख़ुदा

लगता है जैसे क़द मेरा मीनार हो गया

"मौलिक व…

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Posted on October 30, 2020 at 3:30pm — 10 Comments

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"जनाब संजय शुक्ला जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें…"
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"//२ तिश्नगी और मकान में रब्त के बारे में मेरे विचार आप जानते हैं// तिश्नगी सिर्फ़ शराब की ही नहीं…"
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"//आ0 दीपाजलि जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है । लेकिन गजल और समय चाहती…"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"ग़ज़लगुज़रे हैं राह - ए - इश्क़ में हर इम्तिहां से हम lफिर भी वफा को पा न सके जान -ए -जाँ से हम lजो…"
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