For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Asif zaidi
Share
 

Asif zaidi's Page

Latest Activity

Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"बहुत अच्छी कोशिश आदरणीय सुरेन्द्र इन्सान जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें सादर।"
12 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर निकला।। रफ़्ता-रफ़्ता मेरे अहसास पे नश्तर ये लगा। मैंने जिस हाथ को चूमा वही ख़ंजर निकला।।(तरह) जिसकी क़ीमत न ज़माने में लगी हो अब तक। नौक-ए-नैज़ा पे जो गोया था वही…"
12 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर निकला।। रफ़्ता-रफ़्ता मेरे अहसास पे नश्तर ये लगा। मैंने जिस हाथ को चूमा वही ख़ंजर निकला।।(तरह) जिसकी क़ीमत न ज़माने में लगी हो अब तक। नौक-ए-नैज़ा पे जो गोया था वही…"
12 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"*ग़ज़ल* न तो गौहर, न वो जौहर, न सुख़न्वर निकला। सब ने जिसको कहा बरतर वही कमतर निकला।। रफ़्ता-रफ़्ता मेरे अहसास पे नश्तर ये लगा। मैंने जिस हाथ को चूमा वही ख़ंजर निकला।।(तरह) जिसकी क़ीमत न ज़माने में लगी हो अब तक। नौक-ए-नैज़ा पे जो गोया था वही…"
12 hours ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत बहुत बधाई आदरणीय Mahendra Kumar जी बेहतरीन पेशकश की स्वीकार किजिये "
May 30
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय विनय कुमार जी बहुत बहुत आभार आपकी तवज्जो के लिए "
May 30
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत शुक्रिया उस्मानी साहब अभी आप लोगों से और भी बहूत कुछ सीखना है मोहतरम"
May 30
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"*लघुकथा 'क्या लाया'*सवेरे उसकी पत्नी की चीखने चिल्लाने, कोसने की आवाज़ ने उसकी नींद उड़ा दी पता नहीं रात देर कब नींद लगी थी, सोचने लगा अब मैं क्या करूं, पत्नी के ताने, लोगों के सवाल,क्या ख़ुद से लड़ूं, मैं तो जीवन भर का मज़ाक बनकर रह गया,…"
May 30
Asif zaidi posted a blog post

चाँद बता तू कौन हमारा लगता है

चौदहवीं पे कितना प्यारा लगता है। कितना दिलकश ये नज़्ज़ारा लगता है।।आँख मिलाए और कभी शर्माए तू। चांद बता तू कौन हमारा लगता है।।चांदनी हरदम पास हमारे रहती है। चांद मगर क्यों हमसे पराया लगता है।।तुझसे पहले आंखों में यह चुभते हैं। तुझ पे क्यों तारों का पहरा लगता है।।उसका अक्स जो पलकों में धर लेते हैं। क़ैदी सा फिर चांद हमारा लगता है।।आसिफ़ तुम दरिया बन जाते हो जो कभी। उसमें तुम्हारा चांद नहाया लगता है।।मौलिक व अप्रकाशितSee More
May 27
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय Satyanarayan Singh जी बहुत बहुत बधाई बढ़ििया प्रस्तुति पर"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी बहुत बहुत बधाई शानदार मंज़र कशी सादर ।"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय उस्मानी साहब एक बार फिर बधाई सुंदर रचना के लिये।"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय Anamika singh Ana जी बहुत बहुत बधाई सुंदर प्रस्तुति पर ।"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी बहुत बहुत बधाई बढ़िया पेशकश की ।"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब उस्मानी साहब दूसरी शानदार पेशकश की मुबारकबाद क़ुबूल करें मोहतरम ।"
May 19
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बहुत बहुत धन्यवाद नियम से अवगत ककराने के लिये सादर।"
May 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
Poet

Asif zaidi's Blog

चाँद बता तू कौन हमारा लगता है

चौदहवीं पे कितना प्यारा लगता है।

कितना दिलकश ये नज़्ज़ारा लगता है।।

आँख मिलाए और कभी शर्माए तू।

चांद बता तू कौन हमारा लगता है।।

चांदनी हरदम पास हमारे रहती है।

चांद मगर क्यों हमसे पराया लगता है।।

तुझसे पहले आंखों में यह चुभते हैं।

तुझ पे क्यों तारों का पहरा लगता है।।

उसका अक्स जो पलकों में धर लेते हैं।

क़ैदी सा फिर चांद हमारा लगता है।।

आसिफ़ तुम दरिया बन जाते हो जो कभी।

उसमें तुम्हारा चांद…

Continue

Posted on May 26, 2019 at 12:30am

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:14pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब हौसला बढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 3:20pm on March 6, 2019, Ahmed Maris said…

Good Day,

How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day

Thanks God bless

Stella.

At 11:43pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब
At 9:47am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer left a comment for Samar kabeer
"अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।"
22 minutes ago
dandpani nahak left a comment for Samar kabeer
"परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा…"
37 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,तरही  मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
41 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'आँख मौसम ने फिराई, रौ…"
47 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब दण्डपाणि "नाहक़" जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"सच के पैकर में निहाँ झूठ सरासर निकला हमने गौहर जिसे समझा था वो पत्थर निकला कद से औक़ात समझने की…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी कुछ और समय चाहती है…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,बहुत समय बाद ओबीओ के तरही मुशायरे में आपको देख कर ख़ुशी हुई । तरही…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय दण्डपाणी भाई , बढिया कही है ग़ज़ल , बधाई"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय आसिफ भाई , बधाई अच्छी ग़ज़ल कही ! मुख फाड़ेगा जो कलयुग तो ये सतयुग ने कहा…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आ. सुरेंदर भाई ग़ज़ल अच्छी कही , बधाई आपको"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आँख मौसम ने फिराई, रौ फिरा कर निकला। फिर घटाओं की जफ़ा से जला इक घर निकला।1 सुर्ख़ियों में हो गईं आज…"
3 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service