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Anurag Mehta
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Jul 3, 2019
Anurag Mehta posted a blog post

चंद अशआर

पायलों की खनक में दबा रह गया दर्द आँखों में तन्हाई का रह गया वो गया या नहीं, फ़र्क़ क्या रह गया जहन में एक बस हादसा रह गया रोकने की बहुत कोशिशें कीं मगर वो गया और मैं देखता रह गया अब के बिछड़ो तो दिल तोड़ जाना सनम फिर न कहना कि इक आसरा रह गया रात की सिसकिया थक के सोने चली रौशनी से मेरा राब्ता रह गया जाम छलके हैं कैसे करूँ इब्तेदा कुछ मज़ा कुछ नशा यार का रह गया मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jun 12, 2019
Anurag Mehta is now a member of Open Books Online
May 24, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Moradabad
Native Place
India
Profession
Businessman

Anurag Mehta's Blog

चंद अशआर

पायलों की खनक में दबा रह गया
दर्द आँखों में तन्हाई का रह गया

वो गया या नहीं, फ़र्क़ क्या रह गया
जहन में एक बस हादसा रह गया

रोकने की बहुत कोशिशें कीं मगर
वो गया और मैं देखता रह गया

अब के बिछड़ो तो दिल तोड़ जाना सनम
फिर न कहना कि इक आसरा रह गया

रात की सिसकिया थक के सोने चली
रौशनी से मेरा राब्ता रह गया

जाम छलके हैं कैसे करूँ इब्तेदा
कुछ मज़ा कुछ नशा यार का रह गया

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on June 12, 2019 at 2:00pm — 3 Comments

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At 5:14pm on May 17, 2025, Erica said…

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