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डॉ.सुनीता(कविता)
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varanasi u.p.
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chakiya
Profession
Teaching
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मुस्कुराते हुए जहाँ को सवारुं गुनगुनाते हुए अस्मा में उड़ू मन पंक्षी बन गाये धरती को नव-जीवन से सजाएँ. कोरे कागज़ पर अनभूति के अविरल क्षण जग को महकाएं. हर मौसम के संग हर कोई बिन दर्द के मल्लाहार सुनाये.

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At 10:44pm on July 12, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

हार्दिक बधाई जन्म दिवस पर मित्र डॉ  सुनीता  जी ...प्रभु आप के सारे प्यारे सपनों को साकार कर सुख शांति दे प्रगति के सोपान पर ले चले ..जय श्री राधे 

 
भ्रमर ५
At 10:14am on December 10, 2011, devendra upadhyay said…

Ye saari duniya kehti hai k kisi ek k jaane se zindgi ruk nahi jati..
Lekin ye koi nahi jaanta k laakhon k mil jaane se bhi uss ek ki kami poori nahi ho paati

At 3:34pm on November 30, 2011, Admin said…

 
 
 

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