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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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प्रभु नीलकंठ त्रिनेत्र धारी आपको प्रणाम हैं ,

प्रभु नीलकंठ त्रिनेत्र धारी आपको प्रणाम हैं , रक्षा कर संघार कर जो कर ये तेरा काम हैं , प्रभु ... सबको अमृत देने वाले विष लेते आप ही , झोप…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Sep 1, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

खंडकाव्य : जय गणेश

जय गणेश - सर्ग १ - उपसर्ग १ छंद : दोहा   है ग्यारह आयाम से, निर्मित यह संसार सात मात्र अनुमान हैं, अभी ज्ञात हैं चार।   तीन दिशा आयाम हैं,…

Started by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

2 Aug 2, 2011
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

प्रभु की रेल.

प्रभु की रेल. थक जाते हैं लोग जब, कष्ट हजारो झेल, कम बिगड़ते देख कर ,बुद्धि होती फेल. दुश्मन धक्का मारता,हँसे ठठाय ठठाय, हित भी मुखड़ा फेरत…

Started by R N Tiwari

1 May 9, 2011
Reply by कमल वर्मा "गुरु जी"

Abhay Deepraaj krit - Saraswatee vandanaa - 2

अभय कान्त झा दीपराज कृत -              सरस्वती वंदना - २ हे   वीणावादिनी,   हंसवाहिनी,   हमें   ज्ञान  का  वर  दे | देवतुल्य  मानवता  से …

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Apr 26, 2011

Dharmik Sahitya

is manch par aaake kuch dharmik vicharon se parichit hui hoon..aagae aur padhne ki iccha hai..

Started by Devi Nangrani

0 Mar 1, 2011

भोला हैं अघरदानी सारा ये दुनिया माने मन में यही उतार ले ,

भोला हैं अघरदानी सारा ये दुनिया माने मन में यही उतार ले , हर हर महादेव के नाम ले भाई हर हर महादेव के नाम ले , डमरू बजने वाला दुःख घटाने वाल…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Feb 24, 2011

"मेरे मन मधुबन में आओ"

मेरे मन  मधुबन में आओ-२- श्याम हम झूला झूलें रे  प्रेम के हिंडोले पर मुझको बिठाकर श्याम प्रीत की पींगे बढ़ावो रे श्याम हम ...............…

Started by vandana gupta

2 Jan 19, 2011
Reply by vandana gupta

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Hanumaan Ram ko sandeshaa do......................By Abhay Deepraaj

अभय कान्त झा दीपराज कृत-          हनुमान , राम को संदेशा दो......                हनुमान,  राम  को   जाकर  ये  संदेशा  दो-   प्रभु  आ  जायें…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

1 Jan 18, 2011
Reply by vandana gupta

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Prarthanaa .................................By Abhay Deepraaj

अभय कान्त झा दीपराज कृत -                      प्रार्थना मैं   विवेक  के  गंगा  जल से,  सारे जग  का  मल  धोऊँ |हे  प्रभु  मुझको  शक्ति  दे,…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Jan 13, 2011

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Chakradhar Stuti.....................by Abhay Deepraaj

 अभय कान्त झा दीपराज कृत -                    चक्रधर स्तुतिराम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे |अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Jan 12, 2011

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"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
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"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
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सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
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  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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