For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अंबर' जी की पुस्तक 'देश को प्रणाम है' की पुस्तक समीक्षा

'देश को प्रणाम है' : इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

कविवर अंबरीष श्रीवास्तव 'अंबर' जी के काव्य संग्रह से गुजरना छंदमय कविता के उस युग से साक्षात्कार करने के समान है जब अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का 'प्रिय प्रवास' अपनी स्वर्णरश्मियाँ' बिखेरा करता था अथवा जब जगन्नाथदास 'रत्नाकर ' ने विरह और दर्शन का अप्रतिम काव्यग्रंथ 'उद्धव शतक' रचा होगा , या फिर जब मैथलीशरण गुप्त और रामाधारी सिंह 'दिनकर ' जैसे महाकवि हिन्दी की छंदबद्ध कविता की कीर्ति पताका दिग्दिगंत तक फहराया करते थे । युग बदला , लोग बदले , कवियों के कहने के अंदाज़ बदले । छायावादी युग तक तो सब कुछ ठीक ठाक चला। फिर प्रयोगवाद और प्रगतिवाद के दौर से निकल कर कविता ने नयी कविता का रूप धरा । उसके बाद छंदमुक्त हो कर हिन्दी कविता निर्द्वंद होती चली गयी और आगे चलकर यह पूर्णतः निरंकुश हो गयी । कविता हमारे समय में दुर्भाग्यवश एक पर नुची हुई निरीह चिड़िया की भांति हो गई है । आज हर तीसरा व्यक्ति उस चिड़िया के एक दो पंख और नोच कर स्वयं को बड़े आत्मविश्वास के साथ कवि घोषित कर देता है , भले ही रचना के नाम पर वह तुकबंदी से अधिक कुछ न कर रहा हो । ऐसे में काव्य ऋषियों द्वारा प्रतिपादित परंपरा को आधिकारिक एवं सशक्त ढंग से यदि कोई वास्तविक सुकवि आगे बढ़ाने का कार्य करता है , तो उसका सृजन निश्चय ही न केवल सार्थक है बल्कि वह स्तुत्य भी है । आज के इस अराजक समय में कविता के प्रति ऐसे समर्पित प्रयास को यदि भगीरथ प्रयत्न की संज्ञा दी जाए तो अतिशयोक्ति न होगी |

कविवर अंबर का प्रस्तुत काव्य संग्रह 'देश को प्रणाम है' इन अर्थों में हमें बेहद आश्वस्त करता है ।इस काव्यसंग्रह में छंदबद्ध कविताओं का सौन्दर्य एवं सौष्ठव दर्शनीय है । कवि ने प्रायः सभी प्रकार के छंदों में रचनाएँ की हैं । घनाक्षरी, छप्पय, विष्णुपद, सवैया, बरवै, कुंडलियाँ, हरिगीतिका, चौपाई , दोहा- कहने का तात्पर्य यह कि शायद ही कोई छंदबद्ध कविता का ऐसा स्वरूप होगा जो उनकी कलम से छूटा होगा , जिसमें उन्होने कुछ न कुछ रचा न होगा । यह काव्य शास्त्र में उनके बहुविध ज्ञान का भी परिचायक है । प्रस्तुत संग्रह के बीच बीच में और अंत में विशेष रूप से वह छंदो को परिभाषित भी करते हैं । यह हिन्दी की पारंपरिक कविता का मर्म समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसलिए अंबरीष श्रीवास्तव अंबर जी का यह काव्य संग्रह नितांत पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी है । अंबर जी की काव्य दृष्टि उनके उपनाम की भांति बड़ी व्यापक है । वह एक श्रेष्ठ कवि एवं काव्यसाधक हैं । ऐसे कवि अब इस आपाधापी के युग में दुर्लभ हैं । सबसे विलक्षण बात उनका एक इंजीनियर होने के साथ साथ एक शुद्ध कवि होना है । शुद्ध इसलिए कह रहा हूँ कि छंदमुक्त कविता की अपेक्षा मात्रा , ध्वनि और लय से संयुक्त कविता लिखना कोई सरल कार्य नहीं है, जब तक आपको कविता के शास्त्रीय स्वरूप का सम्यक ज्ञान न हो । अंबर जी काव्यजगत में उस अभाव कि पूर्ति करते हैं । अतः यह एक बहुत शुभ एवं स्वागत योग्य बात है ।

'देश को प्रणाम है' में कवि ने विविध विषयों पर काव्य सृजन किया है । जीवन मूल्यों के प्रति वे सजग कवि है । साथ ही समकालीन सरोकारों से भी अभिन्न रूप से उनका जुड़ाव है । उदाहरण के रूप में वह अपने देश कि यदि बात करते हैं तो उनकी उदारवादी दृष्टि महिला शिक्षा अधिकार के लिए संघर्षरत उस पाकिस्तानी किशोरी मलाला युसुफजई की कुशलता के लिए भी चिंतातुर है जब वह ' तालिबानहि दे यहि लोक निकाला' में अपनी सदाशयता को व्यक्त करते हैं । कवि स्वदेश कि वर्तमान विसंगतियों पर आम नागरिक की भांति व्यथित है । अपनी खिन्नता एक दोहे मे वह इस प्रकार व्यक्त करता है |

-कूटतंत्र की राह पर छूटतंत्र का राज ।
लोकतंत्र है सामने रामराज्य है आज ॥

कवि 'रामराज्य' को यहाँ व्यंग्यार्थ में प्रयोग कर रहा है । वह यहीं नहीं रुकता, भग्न हृदय हो यहाँ तक कहता है -

बदले भ्रष्टाचार का यह आचार विचार ।
फौजी डंडा चाहिए हममे करे सुधार ॥

कविवर अंबर जी कि यह काव्यकृति अनेक काव्य प्रसूनों से सजी एक ऐसी वाटिका है , जिसकी सैर हर व्यथित मन को आह्लादित और विभोर करेगी । यह मेरा मानना है। इस अनुपम कृति के लिए कविश्रेष्ठ को मेरा साधुवाद ।

सुधाकर अदीब
निदेशक ,
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान , लखनऊ ।

Views: 428

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
7 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
19 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service