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           लफुअन के संगत में पड़ कमे उमिर में गुड्डूआ के जुआ क लत लाग गईल. एक महीना बाद संघतिहन के निहोरा प उ डेरात-डेरात फेनु जुआ खेले बईठ गईल. घरे आईल त माई के धियान से देखSलस, माई के तबियत ठीक-ठाक देख ओकरा कुछ संतोष भईल.

                       फेनु .... दूसरा, तीसरा आ चउथो दिन जुआ खेलSलस आ घरे आ के माई के धियान से देखSलस, माई एकदमे ठीक रहली उनुका कुछो ना भईल रहे. गुड्डूआ अब बुझ गईल जे उ झूठे डेरात रहे, माई खलिहा डेरवावे खातिर आपन किरिया खियअईले रहली. इ किरिया-उरिया से कुछो ना होला.

(मौलिक व अप्रकाशित)
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झकास कहानी

आभार स्वेतांक गुप्ता जी.

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