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ईश अंश ही अजर अमर है
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शास्वत सत्य सनातन जानो, ईश-अंश ही अजर-अमर है ।
शेष सभी जीवों का निश्चित, होता आया जन्म-मरण है ।।

जन्म-मरण की विधि नैसर्गिक, कोई रोक नहीं सकता है ।
जीव-जगत का शास्वत खेला, कर्मों पर निर्भर करता है ।।
स्थूल शरीरा सब जीवों का, पञ्च-तत्व से निर्मित घर है ।
शास्वत सत्य सनातन जानो, ईश-अंश ही अजर-अमर है ।।

भटके मृग पाने कस्तूरी, रहती लेकिन प्यास अधूरी ।
कर्म-प्रधान सभी ने माना, सद्कर्मो से क्यों फिर दूरी ।।
आया जो भी जीव जगत में, सबका ही जीवन नश्वर है ।
शास्वत सत्य सनातन जानो, ईश-अंश ही अजर-अमर है ।।

क्षण-भंगुर जीवन जीवों का, उठे बुलबुला जैसे पानी ।
मृत्यु-लोक में आना-जाना, सुनते आये कथा पुरानी ।।
मन मंदिर में वास ईश का, करते उसकी नहीं कदर है ।
शास्वत सत्य सनातन जानो, ईश-अंश ही अजर-अमर है ।।

- लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

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