For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ओबीओ लखनऊ चैप्टर साहित्यिक गोष्ठी, माह जुलाई 2018 – एक प्रतिवेदन

ओबीओ लखनऊ चैप्टर साहित्यिक गोष्ठी, माह जुलाई 2018 – एक प्रतिवेदन

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की मासिक साहित्यिक गोष्ठी रविवार दिनांक 22 जुलाई 2018 के दिन लखनऊ के प्रतिष्ठित शायर श्री आलोक रावत ‘आहत लखनवीके सौजन्य से सम्पन्न हुई. संयोजक डॉ शरदिंदु मुकर्जी के रोहतास एंक्लेव, फैज़ाबाद रोड स्थित आवास पर इस कार्यक्रम के प्रारम्भ में ही पता चला कि हमारे तीन नियमित, सक्रिय और महत्त्वपूर्ण साथी – सुश्री संध्या सिंह व सर्वश्री गोपाल नारायण श्रीवास्तव तथा मनोज शुक्लमनुजव्यक्तिगत मजबूरियों के कारण उपस्थित नहीं रह पाएँगे. वहीं बहुत दिनों बाद अपने पुराने साथी प्रदीप शुक्ल ने कानपुर से आकर गोष्ठी में प्रतिभागिता की.

इस महीने, गोष्ठी के पहले सत्र में हमारी नयी कोशिश के अनुसार पुस्तक परिचर्चा के अंतर्गत कुंती मुकर्जी की पुस्तक “अहिल्या - एक सफ़र पर बात करने से पहले सभी का आग्रह था कि लेखिका के मुँह से उनकी अपनी बात सुनी जाए. कुंती जी ने हमें सहज वार्तालाप की शैली में बताया कि कैसे मॉरीशस की एक हाई प्रोफ़ाईल महिला ने आकर उन्हें अपनी जीवन कथा सुनायी और उस कहानी को पुस्तक का रूप देकर हमेशा के लिए अमर कर देने की इच्छा व्यक्त की. इसके बाद उक्त उपन्यास में वर्णित घटनाओं के संदर्भ में हमें ऐसी बातें सुनने को मिलीं कि मन-मस्तिष्क रोमांचित हो उठा.

कुंती जी के वक्तव्य के बाद संयोजक डॉ शरदिंदु मुकर्जी ने पाठकीय प्रतिक्रिया के लिए डॉ अशोक शर्मा से निवेदन किया. मूर्धन्य कथाकार और कवि डॉ शर्मा ने पुस्तक में कुछ त्रुटिपूर्ण वाक्य विन्यास की ओर ध्यान आकर्षित किया  और सुझाव दिया कि पुस्तक के दूसरे संस्करण में उन्हें ठीक कर लिया जाए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मूलत: फ़्रेंच भाषी लेखिका द्वारा हिंदी में इस कलेवर का मौलिक उपन्यास लिख देना ही बहुत बड़ी बात है. उनके अनुसार यह पुस्तक सभी दृष्टि से उन्नत है और ‘बेस्ट सेलरबन सकती है. लेकिन इसके लिए “अहिल्या-एक सफ़र” को अधिक से अधिक पाठक तक पहुँचाना होगा. उनका कहना था कि बाज़ारवाद के इस युग में अपनी कृति को लोगों तक पहुँचाने का काम रचनाकार को स्वयं ही करना पड़ता है. आलोक रावतआहत लखनवीने भी यह पुस्तक पढ़ी है. वे डॉ शर्मा से पूरी तरह सहमत थे. उन्होंने कहा कि पुस्तक में जिस तरह शुरू से अंत तक रोचकता बनी रहती है वह प्रशंसनीय है. “अहिल्या-एक सफ़र” पर विचार हेतु आने वाले दिनों में एक और ऐसी अनाड़म्बर गोष्ठी की आवश्यक्ता से सभी सदस्य एकमत थे.

आज की गोष्ठी के आयोजक आलोक रावत जी को दूसरे सत्र में काव्य-पाठ का संचालन करने का दायित्व सौंपा गया. वे काफ़ी अस्वस्थ थे लेकिन फिर भी कुछ देर तक संचालन करने का दायित्व उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया. पूरी गोष्ठी की अध्यक्षता शुरू से ही डॉ अशोक शर्मा ने की.

यह स्पष्ट था कि स्वास्थ्यगत कारणों से आलोक जी हमारे साथ देर तक नहीं बैठ पाएँगे. अत: हम सबके अनुरोध पर अपने अनोखे अंदाज़ में उन्होंने अपनी ही रचना से सत्र का श्री गणेश किया –

जब भी खेतों में धान मरता है

साथ उसके किसान मरता है.

कहाँ मरते हैं मुसलमाँ – हिंदू

मेरा हिंदोस्ताँ मरता है

इन पंक्तियों में छुपे दर्द को आत्मसात करना हमारे विवेक और चैतन्य को चुनौती देना है.

अगले कवि के रूप में व्यंग्य रचनाकार मृगांक श्रीवास्तव का आह्वान हुआ. नए और कुंठित विषयों को लेकर काव्य रूप देना उनकी विशेषता है. आज के युग में सामाजिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर सीधे सपाट शब्दों में उन्होंने सुनाया –

एक लड़की की एक लड़की से

एक लड़के का एक लड़के से

शादी का विचार

नर-नारी के प्रेम सुख के इतर

नए नए सुख का आविष्कार

प्रदीप शुक्ल वैज्ञानिक हैं. उनकी रचनाओं में भावों की शृंखला और स्वस्थ तार्किकता का समन्वय देखने को मिलता है. हास्य और व्यंग्य का पुट लिए हुए उनके द्वारा प्रस्तुत “तोंद” कविता की बानगी देखिए –

मत सोचो कि घटी नहीं अंगूर सो खट्टे

केवल नर में नहीं चला यह देवों तक में

तोंद लिए बस एक देवता गणपति अपने

प्रथम हैं पूजे जाते देव पड़े हैं कितने.

संचालक-आयोजक आलोक रावत को अब जाना था. अत: संचालन का दायित्व ग़ज़लकार भूपेंद्र सिंह जी के सक्षम कंधों पर पड़ा. उन्होंने कुंती मुकर्जी को आमत्रित किया रचना पाठ के लिए.

हल्के-फुल्के हास्य व्यंग्य के परे कुंती मुकर्जी की रचनाएँ गंभीर हैं और विद्वानों को भी सोचने पर मजबूर करती हैं. नारी की कोमलता, क्रोध और क्रांति उनकी रचनाओं में प्राय: दृष्टिगोचर होती हैं, यथा –

सुबह की बेला मेरी है

दिन की चर्या भी मेरी धुरी पर चलती है

मैं शाम की गति से चलती हूँ

रात जब थककर

मेरी ज़ुल्फ़ों पर रुकती है

मैं ही सृष्टि रचती हूँ

अपनी कोख में

पल-पल जीती हूँ

एक क्षण में कितनी बार मरती हूँ

पुन: जीवित होने के लिए.

वर्तमान प्रतिवेदक शरदिंदु मुकर्जी ने अपनी नवीनतम रचना ‘बारिश की बूँदेंपढ़कर सुनाया –

धरती के गालों पर

थपकी सी गिरती बारिश की बूँदें

और –

ईर्ष्या से जलता

घोर कृष्ण वर्ण निर्मम आकाश

रात्रि के पट पर

अपनी ज्वाला को रेखांकित करता हुआ

हवा के केश पकड़कर झिंझोड़ रहा है –

मैं अचम्भित हूँ!

हमारी मासिक गोष्ठी में पहली बार पधारे अशोक शुक्ल अंजान मुख्यत: सामयिक विषय पर लिखते हैं. उनके द्वारा किया गया शब्दों का प्रयोग देखिए –

लड़के लड़ के ले रहे

धन दौलत घर-बार

किंतु बेटियाँ चाहतीं

माँ बापू का प्यार.

अब संचालक भूपेंद्र सिंह की बारी थी. हम सब उनके ग़ज़लकार की छवि से भलीभाँति परिचित हैं. आज उन्होंने सस्वर वाणी वंदना कर हमें चकित कर दिया –

जयति जय जय माँ सरस्वती

जयति वीणा धारिणी

जयति पद्मासना माता

जयति शुभ वरदायिनी

जगत का कल्याण कर माँ

तू है विघ्न विनाशिनी

अंत में अध्यक्षता कर रहे डॉ अशोक शर्मा ने दार्शनिक भावों से समृद्ध अपनी रचना का पाठ किया –

सुनिए जरा

आपने ईश्वर को देखा है क्या?

सभी के सम्मिलित अनुरोध पर डॉ शर्मा ने अपना गीत ‘....प्रेम तब जन्मा होगा’ गा कर सुनाया. इसी के साथ ही गोष्ठी औपचारिक ढंग से समाप्त हुई लेकिन गोष्ठी को पूर्णत्व मिलता है जब वह अनौपचारिक विषयों से लबालब होकर विचारों के आदान-प्रदान के बीच समाप्त हो. आज ठीक वैसा ही हुआ. काव्य-पाठ का अंत होने के बाद सामान्य जलपान के बीच ही हिंदी के रचनाकारों द्वारा हिंदी भाषा की अनदेखी करने पर बात छिड़ गयी. बहुत से उदाहरण दिये गए. डॉ शर्मा तथा भूपेंद्र जी द्वारा विशेषरूप से उल्लिखित बिंदुओं ने हम अल्पज्ञान रचनाकारों को समृद्ध किया. यह निश्चय किया गया कि हम नियमित रूप से भाषा की शुद्धता पर चर्चा करेंगे और प्रयास करेंगे कि हमारी रचनाएँ दोष-रहित हों. ऐसे अनायास अड्डा के साथ अंतत: एक सफल गोष्ठी को पूर्णता मिली.

प्रस्तुति : शरदिंदु मुकर्जी  

Views: 640

Reply to This

Replies to This Discussion

आदरणीय दादा श्री
प्रतिवेदन पढ़कर गोष्ठी की गरिमा का पता चला . दुर्भाग्य से इस बार मैं उपस्थित नही हो पाया पर अहल्या -एक सफ़र की चर्चा रोमांचित कर देने वाली है . यह चर्चा अगली गोष्ठी में भी होगी यह मेरे लिए उत्साहवर्धक है क्योकि मैं स्वयम इस पुस्तक पर अपने विचार साझा करने को आतुर हूँ .अंत में एक सफल आयोजन के लियी सञ्चालन, संयोजन और सौजन्यता को नमन . सादर .

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service