For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नादिर ख़ान's Discussions (1,566)

Discussions Replied To (1525) Replies Latest Activity

"ये हुनर रहा न बाकी, तेरे मयकदे में साक़ी तू नज़र से ही पिला दे, कोई जाम तक पहुँचे बहुत…"

नादिर ख़ान replied Aug 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-74

649 Aug 27, 2016
Reply by Samar kabeer

"तेरा घर है अपनी मंज़िल है सड़क भी सीधी सीधी ये पता नहीं के क्यों हम तेरे धाम तक न पहुं…"

नादिर ख़ान replied Aug 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-74

649 Aug 27, 2016
Reply by Samar kabeer

"अच्छी  ग़ज़ल कही आदरणीय शिज्जु भाई ... बहुत मुबारकबाद आपको..."

नादिर ख़ान replied Aug 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-74

649 Aug 27, 2016
Reply by Samar kabeer

"तेरी रहमतें हैं मौला मेरे घौसले पे इतनीमेरी ख़्वाहिशों के ताइर कभी दाम तक न पहुँचे उम…"

नादिर ख़ान replied Aug 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-74

649 Aug 27, 2016
Reply by Samar kabeer

"तेरे नाम से शुरू हो मेरे नाम तक न पहुँचे है वो खत बिना पते का जो मुकाम तक न पहुँचे  …"

नादिर ख़ान replied Aug 26, 2016 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-74

649 Aug 27, 2016
Reply by Samar kabeer

"आस विश्वास से भरी रेशमी लड़ियाँसुन रही हैं अच्छी बातें, बातें रक्षा, सम्मान और बंधन क…"

नादिर ख़ान replied Aug 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70

620 Aug 14, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"घर बेशक छोटा है लेकिनमिल कर इसमें रह लेंगे तेरी बाते सुन लेंगे कुछ अपने मन की कह लें…"

नादिर ख़ान replied Aug 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70

620 Aug 14, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्रदत्त विषय पर उम्दा गीत........  बहुत मुबारकबाद आदरणीया राहिला जी। ........"

नादिर ख़ान replied Aug 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70

620 Aug 14, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"एक उदर के जाये दोनों रही गोद भी एक उत्पाती क्यों हुआ सहोदर भाव लिये अतिरेक गन्दी सो…"

नादिर ख़ान replied Aug 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70

620 Aug 14, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कच्चे धागों में पक्का है भाई बहन का प्यार प्यार ही मज़हब इस धागे का इसमें जीत न हार..…"

नादिर ख़ान replied Aug 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70

620 Aug 14, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service