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नादिर ख़ान's Discussions (1,566)

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"कल तक वो हम नवाँ थे मगर अब नहीं रहे इतना बदल गए हैं तो कैसे यकीं रहे   हम सब को ही ब…"

नादिर ख़ान replied Nov 25, 2017 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89

369 Nov 25, 2017
Reply by Amit Kumar "Amit"

"आदरणीय शेख शहज़ाद साहब सराहनीय कोशिश के लिए मुबारकबाद स्वीकारें ...... "

नादिर ख़ान replied Nov 11, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदर्णीय अरुण जी खूबसूरत बाल गीत के लिए मुबारकबाद ....."

नादिर ख़ान replied Nov 11, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सुंदर बाल गीत है आदरणीय डॉ छोटेलाल जी बधाई स्वीकारें  दूसरे बंध में टंकण त्रुटि रह ग…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

" आदरणीय  सुरेन्द्र जी आपने छंद बद्ध रचना के माध्यम से बचपन के बहुत से खूबसूरत चित्र…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"अदरणीय योगराज सर  आपकी उन्मुक्त सराहना ने  रचना  को  जीवंत कर दिया  बहुत शुक्रिया आप…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"मुझे जगाती है मेरी माँ, जब सूरज नभ पर आता I कैसे जगता सूरज मुन्नू, सोच सोच ये चकराता…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय अखिलेश जी बहुत मनभावन रचना हुयी है मुबारकबाद स्वीकारें ....."

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आ. भाई मो. आरिफ जी, सुंदर कटाक्षिकाओं के लिए बहुत मुबारकबाद ॥ आपसे और बेहतर की उम्मी…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"मकड़जाल (अतुकांत रचना)   उसकी उँगलियाँ दिन भर खेलती रहती हैं मोबाइल के बटन्स के साथ न…"

नादिर ख़ान replied Nov 10, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85

413 Nov 11, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह तो ऋचा जी की ग़ज़ल पर कहा था, यहॉं न जाने कैसे चिपक गया। आपकी ग़ज़ल अभी पढ़ी नहीं है।"
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"मुझे लगता है कि मूल ग़ज़ल के शेर की विवेचना यह समझने में सहायक होगी कि ऐसी कठिन ज़मीनों पर शेर कैसे…"
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Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय तिलक जी नमस्कार  बहुत बहुत आभार आपका इतनी बारीक़ी से  हर एक बात बताई आपने और बेहतर…"
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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"कुछ भी होना नहीं कि तुझसे कहें रोना धोना नहीं कि तुझसे कहें १ मतले में जो क़ाफ़िया निर्धारित हुआ…"
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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल में बह्र, रदीफ़, क़ाफ़िया का पालन अच्छा हुआ है। ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से, ये लुटाना नहीं…"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय, मैने तो आना के हिसाब से ही सब काफिया लिखे है। पूरी रचना पर टिप्पणी करते तो कुछ सीखने का…"
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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें। शेर का शेर के रूप में पूरा होना और एक…"
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