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kanta roy's Discussions (2,219)

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"सूर्य आक्रोश भराशर्माया शीतभाग रहा कोहरा-----सुन्दर बिम्बों का प्रयोग हुआ यहाँ भी। स…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सच्चे जन सहमे दिखें ,फूले दिखें दबंगस्वार्थ की इस धुंध में ,मन की गलियाँ तंग -----बे…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"तू भगाने है चला तन का तमसहै तमस मन का कहूँ सबसे बड़ा------वाह ! छोटी बहर में ये बहुत…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पंक्ति दर पंक्ति बेहतरीन प्रस्तुति हुई है विषय पर आपकी आदरणीय अखिलेश जी । बहुत बहुत…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बेहद संवेदनशील प्रेम का वियोग चित्रण हुआ है यहाँ । इस विधा में आदरणीय सुशील सरना जी…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सूरज के आते ही दरकने लग जाती है बीच की अपारदर्शी चादर , स्वयँ ज़िद छोड़ कर.......... अ…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"छन्न पकैया / सारछंद छन्न पकैया छन्न पकैया , सर्द रात ये काटी बर्फ -बर्फ हुई रक्त -…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वाह ! वाह ! क्या खूब मीठी - मीठी , छन -छन करती , यह छन्न पकैया हुई है । पढकर मन अानं…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जन - मन को आंदोलित करती हुई यह बेहतरीन गजल की पेशकश की है आपने आदरणीय पंकज जी । इस ल…"

kanta roy replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"हमने मंच पर आपकी कमी को बड़े शिद्दत से महसूस किया है इस बार आदरणीय रवि जी।  सादर। "

kanta roy replied Feb 2, 2016 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-10 में स्वीकृत रचनाएँ

70 Feb 18, 2016
Reply by योगराज प्रभाकर

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