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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Discussions (5,288)

Discussions Replied To (4411) Replies Latest Activity

"आ०  भाई  मिथिलेश जी , समय पर बेहद माकूल और उच्च स्तरीय गजल के   लिए  हार्दिक बधाई l"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"आ० प्रतिभा बहन इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई l"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"बहुत ही सुन्दर छंद हुए हैं ...आ० भाई अशोक जी हार्दिक बधाई l"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"आ0 भाई लड़ीवाला जी ,इस  सुंदर दोहा गीत के लिए हार्दिक  बधाई स्वीकारें l"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"आ० भाई शिज्जु जी  प्रदत्त विषय को सार्थक करती सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार…"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"आ० राजेश दी इस सुन्दर के लिए हार्दिक बधाई ."

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"ग़ज़ल ****** मत कर  बेहद रार समय सेकिसने  पाया  पार समय सेपाना  है  जीवन में कुछ गरहठक…"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Sep 12, 2015 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-59

661 Sep 12, 2015
Reply by Ravi Shukla

"उर्दू शब्दों के पर्याय भूलवश नहीं लिख सका क्षमा प्रार्थी हूँ जिश्तरू = चुभन तुन्दखू…"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Aug 21, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-62

440 Aug 22, 2015
Reply by shree suneel

"आ० भाई शिज्जु जी , एक अरसे बाद आपकी ग़ज़ल से रूबरू हुआ , इस उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक ब…"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Aug 21, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-62

440 Aug 22, 2015
Reply by shree suneel

"अगर न ख़्वाब हो शामिल तो वो हक़ीकत क्या न हो जो ख़्वाब, हक़ीकत मे रंगो बू ही नहीं आ० भा…"

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied Aug 21, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-62

440 Aug 22, 2015
Reply by shree suneel

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२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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Sushil Sarna posted a blog post

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