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नादिर ख़ान's Discussions (1,566)

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"कुछ लोग कभी जीवन भर अपने नहीं होते कितना भी उन्हें चाहो पर अपने नहीं होते   दो हाथ क…"

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जो खोखली मुस्कानें , ले हाथ मिलाते हैं कितना भी लिपट जायें , पर अपने  नहीं होते  खूब…"

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"बारिश से हमें कोई फिर खौफ़ नहीं होता।ऐ काश कि मिट्टी के घर अपने नहीं होते।। नायाब सा…"

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"रचना की सराहना हेतु  शुक्रिया आदरणीय दिनेश कुमार जी....."

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया समर  साहब … "

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी ग़ज़ल की सराहना एवं टिप्पणी हेतु आभार। … "

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता जी ...."

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय मिथिलेश सर आप जितनी मेहनत रचनाएँ लिखने में करते है, उतनी ही शिद्दत से सभी रचन…"

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय रवि सर आपकी सलाह सर आँखों पर,  हम खुद भी गिरह एवं १,२ अशआर से  मुतमईन नहीं थे…"

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"शुक्रिया आदरणीया कांता  जी  आपने हमारे संशय को दूर कर दिया । सादर ......."

नादिर ख़ान replied Oct 23, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-64

534 Oct 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
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