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है अगर कोई मुसीबत,

है अगर कोई मुसीबत,

हम तुम्हारे साथ हैं।

है अगर कोई फजीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

गूँजती हैं तूतियाँ,

नक़्क़ारखानों में मगर।

शहनाईओं की हो ज़रूरत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

पाँव में छाले लिए वह

दूर से आया बहुत।

उठ उसे देदो नसीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

आँधी औ तूफान से वह

रुक न पाएगा कभी।

संघर्ष ने की थी वसीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

लौट कर आई लपट,

फिर जलाने को उसे।

है मौसमों की साफ नीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

रख नक़ब तुमने लूटा

है शहर सारा तमाम।

आँसू बहाने की हो तबीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

अब गरीबों को यहाँ पर,

मौत दस्त-ए-आब है।

पूछता है कौन कीमत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

मौलिक तथा अप्रकाशित।

सुधेन्दु ओझा

 

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Comment

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Thursday

अच्छी रचना है आदरणीय...विद्या भी लिख देते तो ज्यादा बेहतर होता है..

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 11, 2018 at 3:28pm

बहुत खूब 

कृपया ध्यान दे...

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