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मैं खरगोश नहीं बनना चाहता

बनते -बिगड़ते
संबंधों की आपा-धापी में
मैं खो जाता हू ॥

हड़बड़ी के चक्कर में
प्रेम खोजने के बदले
नफरत खोज लेता हू ॥

रिंग पहनाने को
शादी में बदल पाता
उससे पहले तलाक खोज लेता हू ॥

इसलिए .....
मैं अब
जिंदगी के रेस में
खरगोश नहीं ,
कछुआ बन कर ही
मंजिल तक जाना चाहता हू ॥

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 11:03pm
इसलिए .....
मैं अब
जिंदगी के रेस में
खरगोश नहीं ,
कछुआ बन कर ही
मंजिल तक जाना चाहता हू ॥

waah babban bhaiya ek baar punah aapney umdda prastuti di hai, thaks,
Comment by baban pandey on June 26, 2010 at 6:32am
Ravina jee, shaadi -vivah ke riste hadbadi me nahi banane chachiye .....isi vishay par hai

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on June 26, 2010 at 12:51am
bilkul sahi kadam uthaya hai apane baban bhaiya...slow and steady wins the race....
Comment by Neet Giri on June 25, 2010 at 7:39pm
रिंग पहनाने को
शादी में बदल पाता
उससे पहले तलाक खोज लेता हू ॥

itni jaldi kya hai sir,
Comment by Rash Bihari Ravi on June 25, 2010 at 7:36pm
इसलिए .....
मैं अब
जिंदगी के रेस में
खरगोश नहीं ,
कछुआ बन कर ही
मंजिल तक जाना चाहता हू ॥
bah kya bat hain

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