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नेताओं देश शर्मसार है तुम पर

जवान होते ही हैं

शहीद होने के लिए

और नेता

वह तो शासक है

सोना उनका हक है

जवान जब गोली खा रहा होता है

नेता पार्टी कर रहे होते हैं

जवानों की चिता को

मुखाग्नि भी

राजनीति का अवसर देती है

उन्हें,

शहीदों की

माओं के चाक सीने पर भी

नमक छिड़कने से भी

बाज नही आते

विलाप, क्रंदन भी

अवसर हैं वोट की तिजारत के।

नेताओं

देश शर्मसार है तुम पर।

 

मीना पाठक
 
मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 783

Comment

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Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:14pm

आप सभी गुणीजनो की रचना पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन करती टिप्पणियाँ मेरे लिए संजीवनी का काम करतीं हैं | आप सभी को सादर प्रणाम, नमन |

सादर

मीना 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:11pm

आदरणीया कुंती जी बहुत बहुत आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:10pm

परम आदरणीय सौरभ सर जी मार्गदर्शन के लिए सादर आभार स्वीकारें | आगे से खयाल रखूँगी 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:06pm

आदरणीया प्राची जी बहुत बहुत हार्दिक आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:04pm

आदरणीय विजय जी रचना सराहने हेतु हार्दिक आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:03pm

आदरणीय गिरिराज जी सादर आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:02pm

आदरणीय संदीप जी हार्दिक आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:01pm

आदरणीय जितेन्द्र जी बहुत बहुत आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 12:00pm

बिल्कुल सही  कहा आपने आदरणीय बागी जी कि " हम सुधर जायें  तो उन्हें कुत्ता भी ना पूछे" पर समस्या तो यही है | रचना पर आप की उत्साहवर्धन करती टिप्पणी के लिए हेदिक आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 11:52am

रचना सराहने के लिए हार्दिक आभार स्वीकारें आदरणीय शकील जी 

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