For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलिया (बीवी बनाम् शेरनी)

जंगल भागी शेरनी, ख़बर छपी अखबार।

फौरन फोन घुमाइए, नज़र पड़े जो यार।।

नज़र पड़े जो यार, पड़े हम भी चक्कर में,

कर डाला झट फोन, उसी पल चिड़ियाघर में।

यहाँ शेरनी एक, करे जो मुझसे दंगल,

'उसे' ढूँढने जाय, इसे तब छोड़ो जंगल।

----------------------------------- सुशील जोशी

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 897

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:14pm

जी हाँ आदरणीय रमेश भाई.... सही कहा...हा..हा...हा.... सादर धन्यवाद...

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:14pm

हा..हा..हा.... आदरणीय गणेश बागी भाई जी.... यह सच है कि काफी दिनों के बाद मेरा यहाँ आना हो रहा है.... लेकिन सच्चाई यही है कि आप सब के बिना रह भी नहीं पाता हूँ.... बस समय एवं कार्य के हाथों विवश हूँ.... फिर भी जब भी समय निकालता है तो कोशिश रहती है कि अपने अग्रजों एवं अनुजों के बीच यहाँ पर आऊँ एवं कुछ सीखूँ.... स्नेहिल टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद...

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:10pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय अरुन भाई... क्या बात है... आपकी टिप्पणी अब पढ़ रहा हूँ और शब्दों का यही फेरबदल मैंने पहले ही कर दिया है... जब आदरणीया राजेश जी की पहली टिप्पणी पढ़ी..... आपको रचना पसंद आई उसके लिए अतिश: धन्यवाद..

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:08pm

हार्दिक धन्यवाद आपका बृजेश जी....

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:07pm

उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धऩ्यवाद आदरणीय गिरिराज जी....

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:06pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी... वैसे आपका परामर्श मैं अब देख रहा हूँ.... मैंने केवल आपका पहला कमैंट पढ़ते ही गलती सुधार ली थी और उसे पोस्ट भी कर दिया था.... लेकिन आपका परामर्श तो और भी शानदार है.... और शायद सच्चाई भी.... हा...हा...हा.... हा.... अरे मुझे ज्यादा नहीं हँसना चाहिए.... शेरनी ने सुन लिया तो.......

Comment by Sushil.Joshi on October 2, 2013 at 9:03pm

हा...हा.... सही कहा आदरणीया राजेश कुमारी जी.... यहाँ तो रोज ही शेरनी से पंगा लेता हूँ..... हा...हा...हा.... और छंद में गड़बड़ी की ओर ध्यान दिलाने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद..... भूलवश ऐसा हुआ जिसे सुधार लिया गया है....

Comment by रमेश कुमार चौहान on October 2, 2013 at 8:01pm

हास्य की जमीन स्वयं/स्वयं का घर ही होता सो शेरनी घर में हास्य रूप में दहाड रही है । बहुत ही सुंदर हास्य के लिये बधाई


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 2, 2013 at 4:55pm

वाह भाई सुशील जी, बहुत दिनों बाद आना हुआ और आते ही सिक्सर,बढ़िया है, बधाई आदरणीय । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 2, 2013 at 1:01pm

आदरणीय सुशील भाई बेहद सुन्दर हास्यप्रद कुण्डलिया छंद रचा है आपने दिल खुश हो गया भाई जी आदरणीया राजेश जी ने उचित कहा है यहाँ शेरनी एक करने से गेयता ठीक हो जाएगी ऐसा मुझे लगता है. इस सुन्दर हास्यप्रद कुण्डलिया छंद हेतु बधाई प्रेषित है स्वीकार करें.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service