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दूर से जो अच्छा लगे ....

( कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या लिखूं ........लेकिन जब कलम उठाया तो जो लिखा आपके सामने है ....आशा है आपको पसंद आएगी )
----------------------------------

दूर से देखने में जो अच्छा लगे ,
पास आने में वो ना अच्छा लगे ।।

जिन आँखों में चाहत हो प्यार की
कभी देखे या ना देखे अच्छा लगे ।।

जैसे बगिया हो कोई पहरों के बीच  
फूल तोड़े ना कोई तो अच्छा लगे ।।

नाम हो रोशनी से बहुत ही भला
काम आये सबको तो अच्छा लगे ।।

चाँद उतरे जमीं पे तो भी ''राम ''
दूर सबके जो रहे तो अच्छा लगे ।।

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Comment

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Comment by श्रीराम on December 15, 2012 at 3:37pm

thanks bhai laxman and ajaybhai.....  aap  @@@@@@@@@@@@@@@ bhi dekh sakte hai

ऐडमिन
2012121503

अन्य लिंक पर आपकी रचनाओं को देखने की क्या आवश्यकता है ? आप यहाँ जो कुछ प्रस्तुत करेंगे वही आपका इस मंच पर परिचय होगा. अन्य साइट के लिंक अनावश्यक रूप से दिया जाना ओ बी ओ के नियमों के विरुद्ध है.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 15, 2012 at 3:36pm

ख्याल सुन्दर है, शिल्प पर यदि काम होता तो अच्छी ग़ज़ल बन सकती थी, केवल लिखने के लिए लिख देना अच्छी बात नहीं, लिखे और उसपर समय दें, अन्य रचनाओं को पढ़े, वीनस जी ने ग़ज़ल की बातें समूह में बहुत ही ज्ञानवर्धक बातें लिखी हैं , आप समय दें , अध्ययन करें और उसके बाद देखिये आपकी रचनाएँ क्या से क्या होती है |

कथ्य पर बधाई |

Comment by Dr.Ajay Khare on December 15, 2012 at 1:54pm

jai shri ram badhai

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 15, 2012 at 12:13pm

आपका लिखने का प्रयास हमें अच्छा लगे श्री राम बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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