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Kanupriya Gupta's Blog (3)

आतंकवाद की भेंट चढ़ गई एक लव स्टोरी

वो मासूम सा लड़का उसे बचपन से भला लगता था ,छोटी छोटी सी आँखें,घुंघराले बाल ,वो हमेशा से छुप छुप के उसे देखती आई थी ,जब वो अपना बल्ला  लेकर खेलने जाता, अपने दीदी की चोटी खींचकर भाग जाता, मोहल्ले के बच्चो के साथ गिल्ली डंडा खेलता हर बार वो बस उसे चुपके से निहार लिया करती थी. जैसे उसे बस एक बार देख लेने भर से इसकी आँखों को गंगाजल की पावन बूदों सा अहसास मिल जाता था . घर की छत  पर खड़ा होकर  जब वो पतंग उडाता वो उसे कनखियों से देखा करती थी जेसे जेसे उसकी पतंग आसमान में ऊपर जाती, इसका दिल भी जोरों…

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Added by kanupriya Gupta on September 15, 2011 at 10:30am — No Comments

हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"

कल शाम से ही स्वर्ग और नरक या कहे तो जन्नत और जहन्नुम  दोनों में हडकंप मचा हुआ है कारण आप सब जानते है. वो एसा कारण तो है ही जिसके कारण हडकंप मच सके आखिर उसने २६ नवम्बर २००८ को पूरे मुंबई में हडकंप मचा दिया था. हाँ में उसी महान (अन्यथा ना ले पर पिछले दो साल से जिस तरह से उसे सर आँखों पर बिठाकर उसकी…

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Added by kanupriya Gupta on July 30, 2011 at 2:30pm — No Comments

कौन हो तुम ?

 

कौन हो तुम ?

अलसाई सी सुबह में कोमल छुवन के अहसास से हो

अनजाने चेहरों में एक अटूट  विश्वास से हो...

 

गडगडाते  बादलों में सुरक्षा के अहसास के जैसे,

काँटों भरी दुनिया में स्वर्ग के पारिजात के जैसे

 

बद्दुआओं की भीड़ में ईश्वर के आशीर्वाद से तुम

लम्बे समय के मौन में आँखों के संवाद से तुम...

 

लड़कपन की उम्र में कनखियों  के प्यार तुम,

हर मोड़ की हार के बाद आशाओं के विस्तार तुम.

 

सूनी आँखों से…

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Added by kanupriya Gupta on July 29, 2011 at 11:30am — 1 Comment

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"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
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