मंजिल हर सोपान की, केवल है अवसान ।
मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।।
छोटी-छोटी बात पर, होने लगे तलाक ।
पल में टूटें आजकल, रिश्ते सारे पाक ।।
छोटे से परिवार में, सीमित है औलाद ।
उस पर भी होते नहीं, आपस में संवाद ।।
पति-पत्नी के प्रेम का, अजब हुआ है हाल ।
प्रेम जाल में गैर के, दोनों हुए हलाल ।।
कत्ल प्रेम में आजकल, हर दिन होते आम ।
नाता जोड़ें गैर से, फिर होते बदनाम ।।
धोखा…
ContinueAdded by Sushil Sarna on August 19, 2025 at 3:00pm — 6 Comments
धोते -धोते पाप को, थकी गंग की धार ।
कैसे होगा जीव का, इस जग में उद्धार ।
इस जग में उद्धार , धर्म से रिश्ते झूठे ।
मन में भोग-विलास, आचरण दिखें अनूठे ।
कर्मों के परिणाम , देख फिर हरदम रोते ।
करें न मन को शुद्ध , गंग में बस तन धोते ।
सुशील सरना / 10-8-25
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Added by Sushil Sarna on August 10, 2025 at 7:00pm — 4 Comments
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