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sandeep tomar
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Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
delhi
Profession
teaching
About me
simple man

बिना शीर्षक

(१४ अगस्त को अलीगढ में किसानो पर की गयी बर्बरता पर लिखी गयी कविता )
बिना शीर्षक 

मौत का अर्थ 

 दृश्य का लुप्त हो जाना नहीं है
और अगर तुम
लुप्त हो भी गए तो
मुझे अफ़सोस नहीं
 तुम्हारी गुमसुदगी भी 
एक परचम है
गरीब के हृदय के लिए ;
 
तुम्हारा जाना
एक शाम हो सकता है
की फिर सुबह होगी 
फिर धुँआ उठेगा
फिर आग सुलगेगी 
और बन जाएगी मशाल ,
पथ पर उतरे 
जन सैलाब की/मुठ्ठिया तन जाएँगी 
दुश्मन की छाती पर ;
 
किसान के औजार 
बन जायेंगे हथियार 
गरीब की रोटी की भी होगी
अग्नि परीक्षा 
नंगे बच्चो का शरीर
मिटना ही है तो मिटेगा,पर
बेगार के लिए नहीं 
खुनी सियासत के लिए ;
अनाज पककर होगा लाल
की मजदूर की आँखें स्याह लाल
नारी की चीत्कार की
कहाँ गए उसके लाल;
 
अब पाना होगा जो कि नहीं है
अब खाना होगा जो कि नहीं है
अंधकार के बादल छटेंगे 
अब उजियारा होगा
तुम्हारी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी
कि तुम्हारी गुमशुदगी भी
एक परचम है.
मौलिक और अप्रकाशित 

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At 8:20pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 10:33pm on February 18, 2013, Admin said…

आदरणीय संदीप तोमर जी, आपने संदीप कुमार पटेल की ग़ज़ल पर लिखा कि ......

//ye gajal hai hi nahi fir admin ne ise kaise post karaya? isme kafiya radeef kuch bhi sahi nahi hai//

मैं बताना चाहूँगा कि ओ बी ओ पर सभी सदस्य एक दुसरे से सीखते हैं, आपकी बातों में गूढ़ता नजर आती हैं, आप बहुत ही जानकार लगते हैं, कृपया अपनी बातों को विस्तार दें, हो सकता है एडमिन से भी कोई भूल हुई हो, कृपया यथा शीघ्र |

 
 
 

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