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SHAFIQE SAIFI
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Mahendra Kumar commented on SHAFIQE SAIFI's blog post मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी
"आ. शफ़ीक़ सैफ़ी जी, इस प्रयास पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें. सादर."
Thursday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on SHAFIQE SAIFI's blog post ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,
"आ. शफीक़ भाई , बिना काफिये की ग़ज़ल नही हो सकती , हाँ ... बिना रदीफ के ग़ज़ल ज़रूर कही जा सकती है .. इस लिहाज़ से आपकी रचना गज़ल की श्रेणी मे नही आ रही है .. प्रयास के लिये बधाइयाँ स्वीकार करें ।"
Thursday
Samar kabeer commented on SHAFIQE SAIFI's blog post ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,
"जनाब रवि शुक्ला साहिब की बातों पर ध्यान दें ।"
Wednesday
Ravi Shukla commented on SHAFIQE SAIFI's blog post ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,
"आदरणीय शफीक सैफी साहब आपने गजल विधा के साथ यह रचना पेश की है मंच के अनुशासन के अनुसार गजल का अरकान या बह्र लिखने की परंपरा है आपने नहीं लिखा जिससे इसका अनुमान नहीं हो पा रहा है कि आपने किस बहर में यह गजल कही है साथ ही काफिया का निर्वाह भी नहीं हो…"
Wednesday
SHAFIQE SAIFI posted a blog post

ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,

ग़ज़ल तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,तुम्हे फूलों की कहूँ रानी ,या गुलबहार कह दूँ ,देखकर के तुमको शर्मा जाये ,ये गुलशन तुम मलका ऐ गुल बोलूं या नौबहार कह दूँ ,तुम चाँद पर भी होती तो फ़ौरन मैं चला आता,तुमसे मिलने को है कितना, दिल, बेक़रार कह दूँ ,मिलती नहीं है फुर्सत मुझे तुमको सोचने से इसे आदत बताऊ अपनी ,या कारोबार कह दूँ,आते हैं ख्वाब तेरे ,अब तो नींद की जगह कितना हैं मुझको "सैफी" तुमसे प्यार कह दूँ।शफ़ीक़ सैफी मौलिक एबं अप्रकाशितSee More
Tuesday
Hari Prakash Dubey commented on SHAFIQE SAIFI's blog post मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी
"अच्छा प्रयास है आदरणीय SHAFIQE SAIFI  जी ,बाकी गुणीजनों की सलाह का संज्ञान लें ! सादर "
Jul 16
Samar kabeer commented on SHAFIQE SAIFI's blog post मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी
"जनाब शफ़ीक़ सैफ़ी साहिब आदाब,अभी आपको बहुत अभ्यास की ज़रूरत है,मंच पर हर विधा के बारे में आलेख मौजूद हैं,उनका अध्यन करें,इस प्रस्तुति के लिए बधाई ।"
Jul 16
Mohammed Arif commented on SHAFIQE SAIFI's blog post मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी
"आदरणीय शफ़ीक़ सैफी जी आदाब, पहली बार मैं आपसे ओबीओ के मंच पर आपकी रचना पढ़ रहा हूँ । आपने रचना विधान नहीं लिखा है । आपकी यह रचना किस विधा के अंतर्गत आती है पता नहीं चल रहा है । वैसे आप में काफ़ी संभावना है उभरने की । गुणीजनों से राय लें । प्रयास के लिए…"
Jul 15
SHAFIQE SAIFI posted a blog post

मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी

अब तो मिजाज ऐ यार में वो घुल गए होगी,मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी, चमक रही होंगी ,खुशी से पेशानियाँ  , ख़त्म हो गयी होंगी, सारी परेशानियाँ  , अब तो गर्द ऐ फिक्र दामन से धुल गयी होगी, मुझको क्या मेरी याद को भी भूल गयी होगी, उसकी गालियों में खुशबु, अब भी आती होगी मेरी जगह अब वो उसको सुनाती होगी , रक़ीब के साथ भी ऐसा ही खुल गयी होगी , मुझको क्या मेरी याद को भी भूल गयी होगी..शफ़ीक़ सैफी मौलिक एबं अप्रकाशितSee More
Jul 15
SHAFIQE SAIFI is now a member of Open Books Online
Jul 15

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ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,

ग़ज़ल 

तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,

तुम्हे फूलों की कहूँ रानी ,या गुलबहार कह दूँ ,

देखकर के तुमको शर्मा जाये ,ये गुलशन

तुम मलका ऐ गुल बोलूं या नौबहार कह दूँ ,

तुम चाँद पर भी होती तो फ़ौरन मैं चला आता,

तुमसे मिलने को है कितना, दिल, बेक़रार कह दूँ ,

मिलती नहीं है फुर्सत मुझे तुमको सोचने से

इसे आदत बताऊ अपनी ,या कारोबार कह दूँ,

आते हैं ख्वाब तेरे ,अब तो नींद की जगह

कितना हैं मुझको "सैफी" तुमसे प्यार कह दूँ।

शफ़ीक़ सैफी…

Continue

Posted on July 17, 2017 at 6:24pm — 3 Comments

मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी

अब तो मिजाज ऐ यार में वो घुल गए होगी,

मुझको क्या मेरी मेरी याद को भी भूल गयी होगी,
चमक रही होंगी ,खुशी से पेशानियाँ  ,
ख़त्म हो गयी होंगी, सारी परेशानियाँ  ,
अब तो गर्द ऐ फिक्र दामन से धुल गयी होगी,
मुझको क्या मेरी याद को भी भूल गयी होगी,
उसकी गालियों में खुशबु, अब भी आती होगी
मेरी जगह अब वो उसको सुनाती होगी ,
रक़ीब के साथ भी ऐसा ही खुल गयी होगी ,
मुझको क्या मेरी याद को भी भूल गयी होगी.

.

शफ़ीक़ सैफी
मौलिक एबं अप्रकाशित

Posted on July 15, 2017 at 1:00pm — 4 Comments

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