For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

BS Gauniya
  • 30, Male
  • Nainital (Uttarakhand)
  • India
Share
 

BS Gauniya's Page

Latest Activity

Afroz 'sahr' commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"आदरणीय गुनिया जी भाव अच्छे हैं पर विधा कौन सी है में समझ ना सका,,,"
Oct 11, 2017
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"यह किस विधा में लिखा है आदरणीय ? सादर |"
Oct 11, 2017
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"बहुत ही सुन्दर गीत हुआ आदरणीय..हार्दिक बधाई"
Oct 10, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"आद0 बी एस गुनिया जी सादर अभिवादन, अच्छा लिखा है आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई। अगर आप विधा भी लिख दें तो हमे प्रतिक्रिया देने में आसानी होंगीं। सादर"
Oct 9, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"आद0 बी एस गुनिया जी सादर अभिवादन, अच्छा लिखा है आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई। अगर आप विधा भी लिख दें तो हमे प्रतिक्रिया देने में आसानी होंगीं। सादर"
Oct 9, 2017
Samar kabeer commented on BS Gauniya's blog post देखो कैसे-कैसे गीत...
"जनाब बी एस गौनिया जी आदाब,पहली बार आपकी रचना पढ़ रहा हूँ,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,क्या ये नवगीत है?,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 8, 2017
BS Gauniya posted a blog post

देखो कैसे-कैसे गीत...

बिन पायल के,साज बिना ये,बाज रहा संगीत।देखो कैसे-कैसे गीत।।राग बसंती, तान-तरानेसुमधुर गायन सकल घराने।ये सोच रहा अनजाने,मेरे ही मनमीत।देखो कैसे-कैसे गीत।।सांझ-सबेरे प्रियतम मेरेतरसाओ न चित-चोर चितेरे।नयना बरसे अश्रु मेरे,बिन प्रियतम ये प्रीत।देखो कैसे-कैसे गीत।।मधुबन की ये संगत सारीबिन पायल सब बाजी हारी।अब कौन कहे मतवारी,हारकर ये जीत।देखो कैसे-कैसे गीत।।"मौलिक व अप्रकाशित" See More
Oct 8, 2017

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
"आदरणीय गौनिया जी , अच्छी कविता हुई है , बधाइयाँ । आ. समर भाई जी की बातों से सहमत हूँ ।"
Sep 13, 2017
Mohammed Arif commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
"प्रिय बीएस गौनिया जी आदाब, अच्छी रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
Sep 12, 2017
BS Gauniya commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
" आभार "
Sep 12, 2017
Mahendra Kumar commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
"अच्छी भावाभिव्यक्ति है आ. बीएस गौनिया जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए और आ. समर सर की बातों का संज्ञान लीजिए. सादर."
Sep 11, 2017
Samar kabeer commented on BS Gauniya's blog post वो तुम थी....
"जनाब बीएस गौनिया जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'वो तुम थी' को "वो तुम थीं" कर लें । 'लफ़्ज़ अल्फ़ाज़ भी सब तुम्हारे' इस पंक्ति में 'अल्फ़ाज़'शब्द 'लफ़्ज़'का बहुवचन है, इसलिये…"
Sep 11, 2017
BS Gauniya posted a blog post

वो तुम थी....

मेरे घर, मेरे शहर, मेरे लफ्जों को एक आहट सी लगी, कि कोई उन्हें छूकर चला गया..  वो ठंडी सी छुवन,  एक भंवर सी कम्पन...  लगा पहाड़ों से कोई  मंदाकिनी आ गयी..  लगा मेरे लफ्जों को,  एक आवाज सी मिल गयी..  जैसे मेरे गीतों को,  कोई छूकर चला गया...  उन्हें कहें भी, क्या कहें.. किस हक़ से कहें ? कि दीदार तो जरूरी था.. इन्तजार तो जरूरी था, या वो ऐतबार भी जरूरी था..  जैसे मेरा कोई अपना हो, जो छूकर चला गया...  चलो मान ली बातें तुम्हारी, सुन ली शिकायतें सारी..  लफ्ज,अल्फाज भी सब तुम्हारे, किरदार भी…See More
Sep 11, 2017
BS Gauniya updated their profile
Aug 16, 2017
BS Gauniya is now a member of Open Books Online
Jul 29, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Nainital
Native Place
Nainital
Profession
Journalism
About me
बेशक, बेकदर हम नही हैं दोस्तो, इज्जतदार भी तो नहीं. किसी पैमाइस ने भले ही जांचा न हो, मगर इतने दागदार भी नहीं...

BS Gauniya's Blog

देखो कैसे-कैसे गीत...

बिन पायल के,

साज बिना ये,

बाज रहा संगीत।

देखो कैसे-कैसे गीत।।



राग बसंती, तान-तराने

सुमधुर गायन सकल घराने।

ये सोच रहा अनजाने,

मेरे ही मनमीत।

देखो कैसे-कैसे गीत।।



सांझ-सबेरे प्रियतम मेरे

तरसाओ न चित-चोर चितेरे।

नयना बरसे अश्रु मेरे,

बिन प्रियतम ये प्रीत।

देखो कैसे-कैसे गीत।।



मधुबन की ये संगत सारी

बिन पायल सब बाजी हारी।

अब कौन कहे मतवारी,

हारकर ये जीत।

देखो कैसे-कैसे गीत।।

"मौलिक व…

Continue

Posted on October 8, 2017 at 8:15am — 6 Comments

वो तुम थी....

मेरे घर, मेरे शहर, मेरे लफ्जों को

एक आहट सी लगी,

कि कोई उन्हें छूकर चला गया.. 



वो ठंडी सी छुवन, 

एक भंवर सी कम्पन... 

लगा पहाड़ों से कोई 

मंदाकिनी आ गयी.. 

लगा मेरे लफ्जों को, 

एक आवाज सी मिल गयी.. 

जैसे मेरे गीतों को, 

कोई छूकर चला गया... 



उन्हें कहें भी,

क्या कहें..

किस हक़ से कहें ?

कि दीदार तो जरूरी था..

इन्तजार तो जरूरी था,

या वो ऐतबार भी जरूरी था.. 

जैसे मेरा कोई अपना हो,

जो छूकर चला…

Continue

Posted on September 10, 2017 at 2:00pm — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका कहना दुरुस्त है। लेकिन हिंदी में स्वाद, से, सीन सबका उच्चारण स ही है। न ही इसके साथ ग़ की तरह…"
2 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"बढ़िया प्रस्तुति"
4 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"अति सुंदर, भावपूर्ण, सन्देशपरक और विषयान्तर्गत सटीक रचना।"
7 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"बहुत बढ़िया कहानी , हार्दिक बधाई आपको"
47 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on Mahendra Kumar's blog post मानव सभ्यता का इतिहास (लघुकथा)
" प्रभापूर्ण सुंदर लघु कथा के  लिए बधाई "
52 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on SudhenduOjha's blog post कर नेकी दरिया में डाल
"बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति , बधाई आप को | सादर "
57 minutes ago
SudhenduOjha posted a blog post

कर नेकी दरिया में डाल

है धुआँ-धक्कड़ और बवालचेहरे-चेहरे लिक्खे सवालकर नेकी दरिया में डाल बाबा खेल-खिलांवे भइय्यानाचे…See More
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सतीश साहिब , प्रदत्त चित्र पर सुंदर चौपई छंद हुए हैं मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं | छंद 2_ पंक्ति…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सत्यनारायण साहिब   , प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर शक्ति छंद हुए हैं…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"मुह तरमा प्रतिभा साहिबा, छन्दों पर आपकी सुंदर और ज़बर्दस्त प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"मुह तरमा बबिता साहिबा, छन्दों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अजय साहिब , छन्दों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service