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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"तनिक सी बात पर यूँ खुद को मारा जा रहा हैजहाँ में  ज़िंदगी  को  अब  नकारा …"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मनन कुमार सिंह जी। बहुत ख़ूब"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद तसदीक़ साहब"
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SALIM RAZA REWA posted a blog post

जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा

2122 1212 22-हौसला जिसका मर नहीं सकता  मुश्किलों से वो डर नहीं सकता  - लोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा है …See More
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"सुना हमने, हकीकत को संवारा जा रहा है लगा ऐसा,गगन को ही उतारा जा रहा है।1 दिलों की बात दिल में…"
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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० सुशील सरना जी, हार्दिक आभार."
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"ग़ज़लहमें हर आजमाइश से गुज़ारा जा रहा है lदिवानों की तरह पत्थर से मारा जा रहा है l मेरा ही आशियाँ…"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"कहाँ मासूमियत का "कल" सँवारा जा रहा हैहै सच तो ये कि इसका "आज" मारा जा रहा…"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय महेंद्र कुमार जी। मुशायरे का आग़ाज़ करने के लिए भी बहुत-बहुत बधाई।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आद0 महेन्द जी उम्दा ग़ज़ल कही आपने, मुशायरे का प्रारम्भ  एक बेहतरीन ग़ज़ल से करने पर आपको बहुत…"
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"मुहब्बत में नफ़ा है या ख़सारा जा रहा हैकभी सोचा न हमने क्या हमारा जा रहा है ये क्या कम है कि उस पर…"
8 hours ago
Neelam Dixit is now a member of Open Books Online
9 hours ago

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