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dandpani nahak's Discussions (742)

Discussions Replied To (4) Replies Latest Activity

"कुकुभ छन्द एक यही बस मन में थी आस, इस तरह संक्रांति मनाना गंगा मईया में लें डुबकी,…"

dandpani nahak replied Jan 23 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129

50 Jan 23
Reply by Saurabh Pandey

"सब वर्दी से सीखें कुछ, आज नेता महान कब तक गाएंगे यही, काक ले गया कान काक ले गया कान,…"

dandpani nahak replied Apr 19, 2020 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-108

123 Apr 19, 2020
Reply by Ashok Kumar Raktale

"ताटंक हाय पानी हाय रे पानी, तेरी यही कहानी है कहीं पर तो तू जरूरत है, और कहीं मनमा…"

dandpani nahak replied Aug 19, 2018 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88

180 Aug 19, 2018
Reply by Saurabh Pandey

"कुण्डलिया पानी कि ये निर्दोषिता,मन सबका ललचाय उस पर निश्छल बचपना,बिल्कुल रहा न जाय…"

dandpani nahak replied Jul 21, 2018 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87

128 Jul 22, 2018
Reply by Saurabh Pandey

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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार। "
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, शानदार अंदाज़ में 'दोहा पंचक' के रूप में प्रस्तुत की गयी आपकी…"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सुंदर भावों से सुसज्जित अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश…"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//आ. अमीरुद्दीन साहब, अर्थ विपर्यय पुनः हो जाएगा, अब । , और, वही दोष भी क्योकि में अथवा अब दोनों…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर प्रणाम - सृजन पर आपकी आत्मीय सराहना और सुन्दर सुझाव का दिल से आभार ।…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//ज़माना यहाँ समय के लिए प्रयुक्त किया है। अतः को का प्रयोग उचित नहीं होगा। क्योंकि यहाँ पर कहन का…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//चलिए, माना, फिर भी, जनाब, 22 ( फैलुन ) पर एक ही साकिन की छूट होगी, 112 तक ही विस्तार मान्य है।…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु सादर आभार ।"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"जनाब अमित कुमार अमित जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का शुक्रिया।"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//मैंने कुछ शेरों को ठीक करने का प्रयास किया है आपका मार्गदर्शन चाहूंगा। जानता है जो बखूबी तेरी…"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी तरही मिसरे पर अति सुंदर गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
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