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गजलअहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही सगर गुणगान अहाँक हम गाबैत रही मध… Started by जगदानन्द झा 'मनु' |
0 | 13 hours ago |
गजलहाथमे हाथ लेने सगरो चलब हम आब तोहर बिना पल भरि नहि जियब हम हो सुखद की कतेको अन्हार जीबन बनि क छाहैर तोहर संगहि रहब हम दीप नेहक मिझेए नहि… Started by जगदानन्द झा 'मनु' |
0 | yesterday |
भक्ति गजलसजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए हरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैए मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै हियामे रस सिनेहक ई जगाबैए जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीक… Started by जगदानन्द झा 'मनु' |
0 | Jun 11 |
प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी (बाबा के गीत )प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ....... प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाब… Started by kanta roy |
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Sep 20, 2016 Reply by जगदानन्द झा 'मनु' |
जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि (लघुकथा)एक दिन दू आदमी के झगड़ा होइत रहैक , जकर गलती रहइ से ओहि ठाम उपस्थित लोक के बेर - बेर दोसर के इंगित कs कहय जे एकर बात पर हमरा देह में आगि लाग… Started by SANJAY KUMAR JHA |
0 | Aug 23, 2015 |
अथ फिनायल कथा !दुःख हरो द्वारका नाथ शरण मैं तेरी ……. ! मोबाइलक घण्टी बाजल ! स्क्रीन पर चमकै छल “ कनियाँ के फोन ” ! इग्नोरक त प्रश्ने नहि !! धरफरा क फोन उ… Started by SANJAY KUMAR JHA |
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Aug 23, 2015 Reply by SANJAY KUMAR JHA |
बेटी आ बहिनक मनोरथ के बारे में सेहो सोचु (लघुकथा)अपना विवाह में बहुत राश संगी साथी के बरियाती जयबाक लेल कहलियनि , एबो केलाह , मुदा एकटा मित्र कहलाह जे जायब त लेकिन दारू पिबे टा करब । हम कह… Started by SANJAY KUMAR JHA |
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Aug 11, 2015 Reply by kanta roy |
चरिपतिया(१)चाहे आहाँ रहु दिल्ली आ मुम्बई,वा रहु देश-विदेशक कोनो कोण में,मैथिल भेटिते मैथिली बाजू टन द' मिठगर बोल में । … Started by SANJAY KUMAR JHA |
0 | Aug 11, 2015 |
सीता माता वन्दनातर्ज़ : जय जय भैरवि अशुर भयाऊनि जय जय सीता मिथिला तारिणी जनक धिया सुखदाईसुन्दर सुमति दिय हे मातादुःख निवारू माईजय जय सीता मिथिला तारिणी ।… Started by SANJAY KUMAR JHA |
0 | Aug 10, 2015 |
गीतई जे साँझ परलै मैया की हमरे जीवनमे मुनल आँखि तकबै कहिया हमरो जीवनमे।। सगर दुनियाँकेँ चिलका माएक आँचर तर हम अभागल कोना भटकै छी दर-दर।। घुर… Started by जगदानन्द झा 'मनु' |
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Aug 10, 2015 Reply by kanta roy |
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