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गणपति महाराजा, पूर्ण करो काजा, दयावंत, दयाधारी.

गौरी नंदन , दूर करो क्रंदन, जाऊँ मैं  बलिहारी.

रिद्धि-सिद्धि के स्वामी, अंतर्यामी, तुम हो बड़े दयालु.

शरण जो आवे, सब पा जावे, कृपावंत हे कृपालु.

बुद्धिमान तुम बुद्धिबल दाता, मूषक तुम्हरी सवारी.

हे लम्बोदर, सिद्धि-विनायक मेटो विपदा  हमारी.

एक दन्त तुम, वक्र-तुंड तुम चक्र सुदर्शन  धारी.

प्रथम पूज्य तुम, मंगल मूर्ती, सब जन तुम्हरे आभारी.

प्रथम पूज्य हो देव अतुल्य हो, मोदक तुमको भावे.

शरण में तुम्हारी जो कोई आवे , संकट सब मिट जावे.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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