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"सफल आयोजन की हार्दिक बधाई ओबीओ भोपाल की टीम को। "

pratibha pande replied May 31 to ओबीओ मासिक साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न: 25 मई-2024

7 May 31
Reply by pratibha pande

"इन्सान के अंदर 'घर' की अवधारणा बहुत सशक्त होती है और  पुल के नीचे गुजर करने वाले आदम…"

pratibha pande replied Mar 31 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-108 (विषयमुक्त)

13 Mar 31
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

"  घर _____  कल्लन वापस आ गया। दोस्तों की प्रश्नभरी निगाहों को नजरअंदाज करता वो चुप…"

pratibha pande replied Mar 31 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-108 (विषयमुक्त)

13 Mar 31
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

" आदरणीय अशोक जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार  "

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"  कोई  बे-रंग  रह नहीं सकता होता  ऐसा कमाल  होली का...वाह.. इस सुन्दर ग़ज़ल के लिये…"

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"बहुत सुन्दर दोहावली.. हार्दिक बधाई आदरणीय "

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"बहुत सुन्दर दोहावली..हार्दिक बधाई आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी"

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"सुन्दर होली गीत के लिये हार्दिक बधाई आदरणीय "

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"होली है _______ यादों के बस्ते से कुछ पल, निकले कहने होली है भैया से मिलने को ह…"

pratibha pande replied Mar 17 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-161

21 Mar 18
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

"समाज मे पनप रही असुरक्षा की भावना के चलते सामान्य मानवीय भावनाएँ भी शक के दायरे में…"

pratibha pande replied Feb 29 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)

18 Feb 29
Reply by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहावलीः सभी काम मिल-जुल अभी, होते मेरे गाँव । चाहे डालें हम वहाँ, छप्पर हित वो छाँव ।। बैठेंगे…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"दिये चित्र में लोग मिल, रचते पर्ण कुटीरपहुँचा लगता देख ये, किसी गाँव के तीर।१।*घास पूस की छत बना,…"
5 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 156 in the group चित्र से काव्य तक
"हाड़ कंपाने ठंड है, भीजे को बरसात। आओ भैया देख लें, छप्पर के हालात।। बदरा से फिर जा मिली, बैरन…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से सम्मानित करने का दिल से आभार । सर यह एक भाव…"
15 hours ago

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मिथिलेश वामनकर commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत बढ़िया दोहा लेखन किया है आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। बहुत बहुत…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । सुझाव के लिए हार्दिक आभार लेकिन…"
Wednesday
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .सागर
"अच्छे दोहें हुए, आ. सुशील सरना साहब ! लेकिन तीसरे दोहे के द्वितीय चरण को, "सागर सूना…"
Wednesday

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मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion कामरूप छंद // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"सीखे गजल हम, गीत गाए, ओबिओ के साथ। जो भी कमाया, नाम माथे, ओबिओ का हाथ। जो भी सृजन में, भाव आए, ओबिओ…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion वीर छंद या आल्हा छंद in the group भारतीय छंद विधान
"आयोजन कब खुलने वाला, सोच सोच जो रहें अधीर। ढूंढ रहे हम ओबीओ के, कब आयेंगे सारे वीर। अपने तो छंदों…"
Tuesday

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मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion उल्लाला छन्द // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"तेरह तेरह भार से, बनता जो मकरंद है उसको ही कहते सखा, ये उल्लाला छंद है।"
Tuesday

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